दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए कहा, “अब दिल्ली में कोई भी झुग्गी बिना पुनर्वास के नहीं हटेगी।” सभी एजेंसियों — DDA, रेलवे और अन्य ज़मीन स्वामी संस्थानों — को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी झुग्गी को उजाड़ने से पहले वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराएं।
सीएम ने बताया कि शहर के बाहरी इलाकों में वर्षों से खाली पड़ी करीब 50,000 फ्लैटों को अब गरीबों को आवंटित किया जाएगा। ये फ्लैट JNNURM योजना के तहत बने थे, लेकिन कभी इस्तेमाल नहीं हुए। अब सरकार इन्हें PM Awas Yojana (Urban) के तहत 700 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत कर योग्य झुग्गी निवासियों को देगी।
गुप्ता ने कहा, “पहले आवास, फिर विकास… अब झुग्गीवासियों को डरने की जरूरत नहीं।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि झुग्गी नीति में जल्द बदलाव किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर कोर्ट का रुख भी किया जाएगा।
पूर्ववर्ती कांग्रेस और आप सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “झुग्गियों को सिर्फ वोटबैंक समझा गया, न सड़क मिली, न पानी, न सीवर… उल्टा उन्हें नशे की ओर धकेला गया।”
दिल्ली में करीब 3.06 लाख परिवार 675 झुग्गी बस्तियों में रहते हैं। यह फैसला उनके लिए उम्मीद की एक किरण है। अब देखना होगा कि ये वादे ज़मीन पर कैसे उतरते हैं — कागज़ी नक्शे हावी होंगे या फिर बुलडोज़र?
