मोहम्मद जुबैर गिरफ्तार : 40 साल पुरानी फिल्म, 4 साल पुराना ट्वीट एक शिकायत और ऐसे सलाखों के पीछे पहुंच गए जुबैर

भारत में ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी के जवाब में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि पत्रकारों को उनके लिखने, ट्वीट करने और कहने के लिए जेल नहीं जाना चाहिए, यह कहते हुए कि यह महत्वपूर्ण है कि लोगों को किसी भी उत्पीड़न की धमकी के बिना खुद को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने की अनुमति दी जाए।

फ़ैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक जुबैर को 2018 में पोस्ट किए गए अपने एक ट्वीट के ज़रिए धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में सोमवार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिसने उसे एक दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया।

पत्रकार जुबैर की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा:”दुनिया भर में किसी भी स्थान पर, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि लोगों को खुद को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने की अनुमति दी जाए, पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से और बिना किसी उत्पीड़न की धमकी के खुद को व्यक्त करने की अनुमति दी जाए”।

दुजारिक यहां दैनिक समाचार ब्रीफिंग में जुबैर की गिरफ्तारी पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे। “पत्रकार जो लिखते हैं, जो ट्वीट करते हैं और जो कहते हैं उसके लिए उन्हें जेल नहीं होनी चाहिए। और यह इस कमरे सहित दुनिया में कहीं भी जाता है,”दुजारिक ने एक पाकिस्तानी पत्रकार के एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि क्या वह जुबैर की हिरासत से रिहाई की मांग कर रहे हैं।

जुबैर की गिरफ्तारी गुजरात के अधिकारियों द्वारा 2002 के गुजरात दंगों में “आपराधिक साजिश, जालसाजी और निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए झूठे सबूत अदालत में रखने” के आरोप में तीस्ता सीतलवाड़ को गिरफ्तार करने के कुछ दिनों बाद हुई।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार एजेंसी ने सामाजिक कार्यकर्ता सीतलवाड़ की गिरफ्तारी और हिरासत पर चिंता व्यक्त की है और उन्हें तत्काल रिहा करने का आह्वान किया हैं। अपराध शाखा निरीक्षक डीबी बराड द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर अहमदाबाद अपराध शाखा में उनके खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद शनिवार दोपहर मुंबई के जुहू इलाके में उनके घर से सीतलवाड़ को हिरासत में लिया गया था।

उसे गुजरात पुलिस दस्ते द्वारा सड़क मार्ग से अहमदाबाद लाया गया। अहमदाबाद अपराध शाखा ने रविवार को सीतलवाड़ को गिरफ्तार कर लिया, जिसके एक दिन बाद उसे मुंबई में हिरासत में लिया गया और गुजरात स्थानांतरित कर दिया गया। “#भारत: हम #WHRD @TeestaSetalvad और दो पूर्व पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी और हिरासत से बहुत चिंतित हैं और उनकी तत्काल रिहाई का आह्वान करते हैं।

2002 #GujaratRiots के पीड़ितों के साथ उनकी सक्रियता और एकजुटता के लिए उन्हें सताया नहीं जाना चाहिए, “संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार ने मंगलवार को ट्वीट किया। अहमदाबाद की एक अदालत ने 2002 के गुजरात दंगों के सिलसिले में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सबूत गढ़ने के मामले में रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता सीतलवाड़ और राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरबी श्रीकुमार को 2 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।

हिरासत में मौत के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे और बनासकांठा जिले के पालनपुर की जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी और आरोपी संजीव भट्ट को ट्रांसफर वारंट पर अहमदाबाद लाया जाएगा।

सीतलवाड़, श्रीकुमार और भट्ट पर 2002 के गुजरात दंगों के सिलसिले में मौत की सजा के साथ निर्दोष लोगों को फंसाने के प्रयास के साथ सबूत गढ़ने की साजिश रचकर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने का आरोप हैं।

2002 के दंगों के मामलों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के एक दिन बाद शनिवार को सीतलवाड़, श्रीकुमार और भट्ट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 

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