अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद जो बाइडेन के इस कमजोर रवैये का असर उनकी घटती लोकप्रियता पर पड़ा है जिससे उनकी अप्रूवल रेटिंग को बड़ा झटका लगा है।
तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद अमेरिका ने अपने नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षित वापसी के लिए निकासी अभियान तेजी से चलाया था। इस अभियान के दौरान अमेरिका ने अपने नागरिकों समेत सभी सैनिकों को अफगानिस्तान से बाहर निकाल लिया, जिसके बाद अमेरिका का निकासी अभियान 31 अगस्त को दो दशकों के लंबे वक्त के बाद समाप्त हो गया।
एनपीआर और पीबीएस न्यूशोर के साथ एक नए मैरिस्ट नेशनल पोल के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग 43 प्रतिशत है जो उनके राष्ट्रपति बनने के बाद से सबसे कम है।
मैरिस्ट पोल के अनुसार, अधिकांश लोगों ने बाइडेन द्वारा अमेरिकी विदेश नीति को संभालने और अफगानिस्तान से अमेरिकियों की वापसी को गलत बता इसे अस्वीकार किया। 26-31 अगस्त के बीच 1200 लोगों के सर्वे में 3.8 प्रतिशत का अंतर पाया गया।
केवल 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे जो बाइडेन द्वारा किए गए काम से सहमत हैं, जबकि 51 प्रतिशत लोगों ने इसपर असहमति जताई और अन्य 7 प्रतिशत ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। मैरिस्ट नेशनल पोल के मुताबिक, बाइडेन की यह अप्रूवल रेटिंग राष्ट्रपति बनने के बाद से 49 प्रतिशत और 54 प्रतिशत के बीच थी, जबकि अब तक का सबसे कम 43 प्रतिशत है।
इस अप्रूवल रेटिंग में स्वतंत्र मतदाताओं के बीच सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। केवल 36 प्रतिशत लोगों ने राष्ट्रपति द्वारा किए जा रहे कामों से खुद को संतुष्ट पाया जबकि इससे पहले का प्रतिशत 46 था। डेमोक्रेट्स के बीच, बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग पांच प्रतिशत नीचे फिसल गई है।
पोल के अनुसार,अधिकतर अमेरिकियों यानी 56 प्रतिशत ने राष्ट्रपति के विदेश नीति को अस्वीकार कर दिया तो वहीं, 61 प्रतिशत नागरिकों ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना और नागरिकों की वापसी को बाइडेन का गलत और जल्दबाजी में लिया हुआ फैसला बताया।
हालांकि ज्यादातर अमेरिकियों का यह भी मानना है कि वो असमंजस में है कि आखिर अफगानिस्तान में क्या होना चाहिए था, लेकिन लगभग 71 प्रतिशत नागरिकों का कहना है कि अफगानिस्तान में अमेरिका की भूमिका असफल साबित हुई है।
वहीं राष्ट्रपति के इस फैसले का विरोध सिर्फ राजनीतिक दलों ने नहीं बल्कि अमेरिकी सेना के पूर्व अधिकारियों ने भी किया है। पूर्व अफसरों ने अफगानिस्तान में अमेरिका के विफलता पर सेना के जवानों और अधिकारियों से इस्तीफों की मांग की है।
लेफ्टिनेंट जनरल विलियम जेरी का कहना है कि यह पूरी तरह से व्हाइट हाउस, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की नाकामी है।
जो बाइडेन ने इस वापसी और विराम को अमेरिकी सेना और राष्ट्रहित में बताया था।
