कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि पैलेस्टाइन मुद्दे पर भारत की चुप्पी अमानवीय और अनैतिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीति संविधानिक मूल्यों या रणनीतिक हितों से नहीं, बल्कि मोदी-नेतन्याहू की निजी दोस्ती से संचालित होती दिख रही है।
गांधी ने दि हिंदू में लिखे लेख “India’s muted voice, its detachment with Palestine” में कहा कि यह “व्यक्तिगत कूटनीति” कभी टिकाऊ नहीं हो सकती। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने 1988 में ही पैलेस्टाइन को मान्यता दी थी और अतीत में दक्षिण अफ्रीका से लेकर अल्जीरिया व बांग्लादेश तक, आज़ादी और मानवाधिकारों के पक्ष में अग्रणी भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा, “7 अक्तूबर 2023 के हमास हमलों के बाद इज़राइल की कार्रवाई नरसंहार से कम नहीं रही। अब तक 55,000 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें 17,000 बच्चे शामिल हैं। ग़ज़ा की शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि व्यवस्था पूरी तरह तबाह हो चुकी है, लोग अकाल जैसी स्थिति झेल रहे हैं।”
सोनिया गांधी ने आलोचना की कि ऐसे समय में भारत ने न सिर्फ़ चुप्पी साधी बल्कि हाल ही में इज़राइल के साथ निवेश समझौता भी किया और उसके अति-दक्षिणपंथी वित्त मंत्री की मेज़बानी की।
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत और नैतिक धरोहर की कसौटी है। हमें पैलेस्टाइन के साथ ऐतिहासिक सहानुभूति दिखानी चाहिए और उसे ठोस कार्यवाही में बदलना चाहिए। आज़ाद भारत की चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि साझीदार अपराध है।”
