संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान ने फिर अलापा कश्मीर राग, आज पीएम मोदी देंगे मुंहतोड़ जवाब

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन पूरा हो चुका है। संबोधन में उन्होंने अपने देश को अमेरिकी कृतघ्नता का और अंतरराष्ट्रीय दोहरेपन का पीड़ित दिखाने की कोशिश की।

इमरान खान ने फिर से कश्मीर का मुद्दा उठाने के साथ ही भारत सरकार के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया। पाक प्रधानमंत्री ने भारत की मोदी सरकार को हिंदू राष्ट्रवादी सरकार और फासीवादी बताया।

इमरान खान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्ताव और कश्मीरी लोगों की इच्छाओं के अनुसार दक्षिण एशिया में स्थायी शांति कश्मीर मुद्दे के समाधान पर निर्भर है, साथ ही पाकिस्तान अपने सभी पड़ोसियों की तरह भारत के साथ भी ‘शांति’ चाहता है।

इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से भारत में अलगाववादी माने जाने वाले गिलानी के पार्थिव शरीर को उचित इस्लामी रस्मों के साथ शहीदों के कब्रिस्तान में दफनाने की अनुमति मांगी। अपने संबोधन में पाक प्रधानमंत्री ने पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के भारत सरकार के फैसले के बारे में भी बात की।

इस बार भी अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा उठाने पर अब भारत की तरफ़ से उन्हें करारा जवाब मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। खबर के मुताबिक, भारत अपने भाषण के दौरान यूएनजीए में कश्मीर को लेकर इमरान खान के हमले पर जवाब देने के लिए अपने अधिकार का उपयोग करेगा। आज संयुक्त राष्ट्र महासभा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे और इसलिए वे न्यूयार्क पहुंच गए हैं।

इमरान खान का पूर्व रिकॉर्डेड भाषण शुक्रवार शाम को प्रसारित किया गया जिसमें उन्होंने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक इस्लामोफोबिया और ‘भ्रष्ट विशिष्ट वर्गों द्वारा विकासशील देशों की लूट’ जैसे कई विषयों पर बात रखी। अपनी अंतिम बात को उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत के साथ किए गए बर्ताव से जोड़ कर समझाने की कोशिश की।

इन सबके अलावा पाक प्रधानमंत्री ने अमेरिका को लेकर भी गुस्सा और दुख जाहिर किया और उस पर पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान दोनों का साथ छोड़ देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में मौजूदा स्थिति के लिए, कुछ कारणों से, अमेरिका और यूरोप के कुछ नेताओं द्वारा पाकिस्तान को कई घटनाओं के लिए दोष दिया गया।

इसके अलावा अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की मंजूरी पर भी इमरान खान खुलकर बोले और कहा कि तालिबान हुकूमत को दुनिया को कबूल करना चाहिए और उसकी मजबूती के लिए खड़ा होना चाहिए। 

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