शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की सालाना बैठक ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में हो रही है जिसे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली माध्यम से संबोधित किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी मोदी को सुन रहे थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अफगानिस्तान का जिक्र करते हुए इस क्षेत्र में, प्रमुख चुनौतियां शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से जुड़ा बताया और इन चुनौतियों का मुख्य कारण बढ़ता कट्टरपंथ को ठहराया।
मोदी ने कहा कि अफगानिस्तान के हालात इस चुनौती को और स्पष्ट करते हैं। इस दौरान उन्होंने नए साझेदार के तौर पर ईरान का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वहपूरे भारत की ओर से तजिक भाई-बहनों का स्वागत करते हैं।
उन्होंने कहा,”इस साल हम एससीओ की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। मैं वार्ता के नए साझेदारों साऊदी अरह, मिस्र और कतर का भी स्वागत करता हूं।”
दुशांबे में हो रही इस बैठक में अफगानिस्तान संकट, क्षेत्रीय सुरक्षा, सहयोग और संपर्क सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर एससीओ की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहले ही वहां मौजूद हैं।
शिखर बैठक के बाद संपर्क बैठक होगी जिस दौरान अफगानिस्तान के मुद्दे पर चर्चा होने पर जोर होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, सहयोग और संपर्क सहित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
इससे पहले विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया था कि एससीओ परिषद के सदस्य देशों के प्रमुखों की 21वीं बैठक शुक्रवार को हाइब्रिड प्रारूप में दुशांबे में हो रही है जिसकी अध्यक्षता ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और वीडियो लिंक के जरिए शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। दुशांबे में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, एससीओ की शिखर बैठक में सदस्य देशों के नेताओं के अलावा पर्यवेक्षक देश, संगठन के महासचिव, एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद निरोधक ढांचे के कार्यकारी निदेशक, तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति एवं अन्य आमंत्रित अतिथि शामिल होंगे। दुशांबे में जयशंकर एससीओ के सदस्य देशों के प्रमुखों की अफगानिस्तान पर एक बैठक में शामिल होंगे।
पहली बार एससीओ की शिखर बैठक इस तरह हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की जा रही है। साथ ही भारत के लिए यह चौथी शिखर बैठक है जिसमें वह एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में हिस्सा ले रहा है।
हाईब्रिड प्रारूप के तहत आयोजन के कुछ हिस्से को डिजिटल आधार पर और शेष हिस्से को आमंत्रित सदस्यों की भौतिक उपस्थिति के माध्यम से संपन्न किया जाता है। विदेश मंत्रालय ने इस बैठक को और महत्वपूर्ण इसलिए बताया क्योंकि संगठन इस वर्ष अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ मना रहा है।
