पंजाब में हुए नेतृत्व परिवर्तन की को देखते हुए राजस्थान का बागी खेमा भी अब सक्रिय होते दिख रहा है। पंजाब राज्य में मचे सियासी उठापटक के बाद कांग्रेस शासित राजस्थान में हलचल तेज होकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के गुटों में सक्रियता बढ़ गई है। दोनों ही पक्षों के कई नेताओं ने दिल्ली में डेरा जमा लिया है। हालांकि मुख्यमंत्री स्वस्थ अवस्था में ना होने के कारण अपने सरकार निवास से फोन के जरिए ही अपने विश्वस्त और केंद्रीय नेताओं से संपर्क में हैं। वहीं पायलट कुछ दिन पहले ही अपना दिल्ली दौरा कर चुके हैं जिस दौरान वह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी अजन माकन से मिले।
इस मामले को हवा और मिल गई जब 19 सितंबर के शनिवार रात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) लोकेश शर्मा ने इस्तीफा दे दिया। इससे कुछ घंटे पहले उन्होंने एक ट्वीट कर पंजाब में कांग्रेस नेतृत्व में हुए बदलाव की परोक्ष आलोचना की थी। शर्मा पिछले एक दशक से अधिक समय से गहलोत से जुड़े थे और उनके सोशल मीडिया की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। दिसंबर 2018 में गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें ओएसडी बनाया गया था।
शनिवार को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के इस्तीफा देने के बाद उन्होंने ट्वीट कर लिखा था कि”मजबूत को मजबूर, मामूली को मग़रूर किया जाए…बाड़ ही खेत को खाए, उस फसल को कौन बचाए!” यह ट्वीट अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस आलाकमान पर तंज माना गया। मुख्यमंत्री के विरोधियों द्वारा इसकी जानकारी आलाकमान तक पहुंचाते हुए तर्क दिया गया कि ट्वीट के माध्यम से पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को लेकर लिए गए फैसले पर अंगुली उठाई गई है। साथ ही इसे गहलोत की भावना के रूप में भी जोड़ा गया।
कहा जाने लगा कि अप्रत्यक्ष रूप से ट्वीट में अमरिंदर सिंह को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने पर सवाल उठाए गए हैं और लहजे से प्रतीत होता है जैसे किसी ताकतवर व्यक्ति को बेसहारा बना दिया गया और औसत दर्जे के किसी व्यक्ति को ऊंचाई पर पहुंचा दिया गया हो।
इसके बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी ने शनिवार को अपना इस्तीफा सौंपा और ट्वीट के लिए माफी मांगी।
