भारत में सरकारी स्कूलों की बद्द्तर हालत किसी से छुपी नहीं है और इसका एक मुख्या कारण है स्कूलों में शिक्षकों का अभाव. हमारे देश में वर्ष 2020-21 तक 10 लाख 60 हज़ार से ऊपर शिक्षकों के पद खाली पड़े है. यह जानकारी खुद केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दी.
जिन राज्यों में सबसे ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े है उसमें सबसे पहला नंबर बिहार का आता है. बिहार में कुल 2 लाख 75 हजार 255 पद खाली हैं. इस लिस्ट में 2 लाख 17 हज़ार पदों के साथ उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर आता है. वहीँ झारखण्ड इस लिस्ट में 95 हज़ार पदों के साथ तीसरे नंबर पर आता है.
इस जानकारी के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने बिहार सरकार को जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया. लोगों ने ‘अनपढ़ रहेगा बिहार तभी तो बदनाम होगा बिहार’ नाम से सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर शेयर करना शुरू कर दिया.
हालांकि बिहार सरकार ने पिछले कुछ समय से शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की हुई है मगर किसी न किसी वजह से वह अंजाम तक नहीं पहुँच पाई है. बिहार के प्रारंभिक से लेकर प्लस टू स्कूलों में शिक्षकों के लगभग 1.24 लाख पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. प्रारंभिक स्कूलों में शिक्षकों के पद भरने हेतु पिछले साल से ही नियोजन प्रक्रिया जारी है, जिसे पूरा नहीं किया जा सका है. हाईस्कूलों में भी शिक्षकों के पद भरने के लिए एसटीईटी की पुनर्परीक्षा अंतिम चरण में है. आपको बतादें की बिहार चुनाव के इस मौसम में विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने की तैयारी में जुट गया है.
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