हरियाणा के हांसी में एक व्यापारी ने 1.60 करोड़ रुपए की बीमा राशी पाने के लिए खुद की मौत का ड्रामा रच डाला. बीते मंगलवार को पुलिस को सूचना मिली की राममेहर नाम के व्यापारी का शव कार में जला हुआ मिला था.
पुलिस के मुताबिक परिवार वालों ने पुलिस को शिकायत में बताया था की राममेहर की मौत से पहले उसने परिवार को फोन कर बताया था की बाइक सवार उसका पीछा कर रहे है और उससे जान से मारना चाहते है. उसके बाद उसका फ़ोन स्विच ऑफ हो गया. पुलिस जब घटना स्थल पर पहुंची राममेहर और कार दोनों जली हुई अवस्था में मिले.
लेकिन पुलिस ने जब जांच की तो पूरा मामला ही बदल गया. पुलिस ने जब पड़ताल की तो राममेहर उन्हें छत्तीसगढ़ में ज़िंदा मिला। पुलिस राममेहर को गिरफ्तार कर हंसी ले आयी और आगे जो उसने बताया पुलिस के होश उड़ गए.
राममेहर ने यह सारा ड्रामा 1 करोड़ 60 लाख की रकम पाने के लिए किया था. जब पुलिस ने उससे सख्ती से पूछताछ की तो उसने बताया उस पर बहुत ज्यादा क़र्ज़ था जिसे वह चुका नहीं पा रहा था. इसलिए उसने यह सारा ड्रामा रचा.
पुलिस ने जब उससे पूछा की गाडी में लाश किसकी थी तो उसने बताया की उसने एक अस्पताल से मरे हुए कोरोना मरीज़ की बॉडी डेढ़ लाख में खरीदी. यह सुने ही पुलिस के पैरों तले ज़मीन खिसक गई. इसके फ़ौरन बाद पुलिस ने अस्पताल में दबिश देकर उन लोगों को गिरफ्तार किया जिन्होंने इस साजिश में राममेहर का साथ दिया था.
पुलिस ने बताया की जब उसने राममेहर की कॉल डिटेल्स खंगाली तो उसमें एक नंबर मिला जिससे वह अक्सर बात किया करता था. वह नंबर उसकी महिला मित्र का था. जब इस महिला मित्र से पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने सारे राज़ खोल दिए.
पुलिस ने बताया की उसे इस सारी घटना में शक तब हुआ जब फॉरेंसिक रिपोर्ट में कुछ अटपटे तथ्य सामने आये. सबसे पहले तो कार के हैंडब्रेक लगे हुए थे. अगर वह जान बचने के लिए भाग रहा था तो उसने गाड़ी के हैंडब्रेक क्यों लगाए. दूसरा जिस सीट पर उसकी लाश मिली थी वह पीछे की तरफ झुकी हुई थी. कोई किसी को आराम से लिटा कर क्यों मारेगा.
जो अगला तथ्य पुलिस को अजीब लगा वह यह था की गाडी मुख्या सड़क पर न होकर सुनसान रोड़ पर खड़ी थी वो भी सड़क किनारे पार्क होकर. यही नहीं, पुलिस को गाड़ी के सिवा वहाँ की और वाहन के टायरों के निशान नहीं मिले जिसके बाद पुलिस को विश्वास हो गया की यह सारी कहानी झूठी है.
