पोस्टरों के जरिए हमला बोलना राजनीति का हमेशा से अहम भाग रहा है। लेकिन इस बार बिहार में राजद परिवार खुद ही इसका शिकार दिखाई दे रहा है। लालू प्रसाद यादव के परिवार में एक बार फिर से शीत युद्ध की पुष्टि तब हुई जब छात्र आरजेडी की तरफ से पटना की सड़कों पर लगाए गए पोस्टर में तेजस्वी की तस्वीर गायब दिखी। पोस्टर में लालू और राबड़ी के साथ तेजप्रताप की तस्वीर तो है लेकिन तेजस्वी कहीं नहीं दिख रहे। ये पोस्टर्स सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, बल्कि पटना में पार्टी दफ्तर पर भी लगाए गए हैं।
रविवार यानी 8 अगस्त को तेजप्रताप ने छात्र आरजेडी की बैठक बुलाई है, जिसमें संगठन से जुड़े सभी पदाधिकारियों को उपस्थित रहने का आदेश जारी किया गया है। इसी के उपलक्ष्य में तेजप्रताप के समर्थकों ने पटना में कई जगहों पर पोस्टर लगाए, जिसमें तेजस्वी यादव को जगह नहीं दी गई है। हालांकि छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष आकाश यादव भी इसमें दिखाई दे रहे है। गौरतलब हो कि बीते 11 जून को पार्टी के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर लगाए गए पोस्टरों से तेजप्रताप यादव की तस्वीर गायब थी। जानकारी के मुताबिक तेजप्रताप पोस्टर में जगह न मिलने से खासे नाराज थे और उनकी यह नाराजगी मंच पर भी दिखी थी। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह पोस्टर की आड़ में राजनीतिक बदला निकालने की बात तो नहीं?
बता दें कि लालू प्रसाद के परिवार में राजनीतिक काम बंटा हुआ है। छात्र राजद की जिम्मेदारी शुरू से ही तेजप्रताप यादव के पास है, जबकि राघोपुर के विधायक तेजस्वी यादव के पास विधानमंडल दल समेत पार्टी की अन्य गतिविधियों की जिम्मेवारी है। ऐसे में छात्र संगठन के पोस्टर में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की तस्वीर न रहने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि इस मामले में परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, किंतु पुराने संदर्भों के आधार पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर पटना में लगाए गए कई पोस्टरों में तेजप्रताप को स्थान नहीं दिया गया था, इसलिए छात्र राजद के पोस्टर को उस पहलू से जोड़कर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि लालू यादव के जेल में रहने के दौरान उनके भी पोस्टर कई बार पटना में लगाए जाते रहे हैं।
