प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से पूछताछ की थी। जांच एजेंसी आज दिल्ली में अखबार के कार्यालयों और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से जुड़े कई अन्य परिसरों सहित करीब 12 स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं।
सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी तलाशी के बाद मामले से जुड़ी संपत्तियों को कुर्क कर सकती हैं। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि महंगाई और बेरोजगारी जैसे अहम मुद्दों पर विपक्ष के सवालों ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया हैं।
पार्टी ने कहा कि वे देश के लोगों को जवाब देने में असमर्थ हैं इसलिए वे असहज सवाल पूछने वालों को अपमानित करने और ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सैयद नसीर हुसैन ने कहा, “सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि कई विपक्षी दलों के नेताओं को परेशान किया जा रहा हैं।
“हेराल्ड हाउस, बहादुर शाह जफर मार्ग पर छापे भारत के प्रमुख विपक्षी-भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के खिलाफ़ जारी हमले का एक हिस्सा हैं। हम मोदी सरकार के खिलाफ़ बोलने वालों के खिलाफ़ इस प्रतिशोध की राजनीति की कड़ी निंदा करते हैं। आप हमें चुप नहीं करा सकते!” कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने ट्वीट किया।
पिछले महीने श्रीमती गांधी से तीन दिनों में 12 घंटे में 100 से अधिक प्रश्न पूछे गए थे। उनके बेटे और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से पहले पांच दिनों तक पूछताछ की गई थी और उनसे लगभग 150 सवाल पूछे गए थे।
गांधी परिवार की जांच की जा रही है जिसे “नेशनल हेराल्ड केस” कहा जाता है, जिसमें यंग इंडियन के एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) का अधिग्रहण शामिल है, जो कि भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्थापित नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी हैं।
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि यंग इंडियन ने एजेएल की संपत्ति में 800 करोड़ रुपये से अधिक का अधिग्रहण किया। आयकर विभाग के अनुसार, इसे यंग इंडियन के शेयरधारकों – सोनिया गांधी और राहुल गांधी की संपत्ति माना जाना चाहिए। जिसके लिए उन्हें कर का भुगतान करना चाहिए।
किसी भी गलत काम से इनकार करते हुए, कांग्रेस का दावा है कि यंग इंडियन एक “नॉट-फॉर-प्रॉफिट” कंपनी है और इसलिए, मनी लॉन्ड्रिंग का कोई सवाल ही नहीं हो सकता हैं। शीर्ष नेताओं से पूछताछ के खिलाफ़ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजधानी और देश भर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया हैं।
उनका आरोप है कि मामला राजनीति से प्रेरित है और केंद्र राजनीतिक प्रतिशोध के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहा हैं।
