लखनऊ के एक होटल में आग लगने के पांच दिन बाद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को चार अलग-अलग विभागों के 15 अधिकारियों को निलंबित करने और चार सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई का आदेश दिया।
सीएम का आदेश दो सदस्यीय जांच पैनल के एक दिन बाद आया है, जिसमें लखनऊ के पुलिस आयुक्त एसबी शिराडकर और आयुक्त (लखनऊ डिवीजन) रोशन जैकब शामिल हैं, ने अपनी रिपोर्ट राज्य के गृह विभाग को सौंप दी हैं।
एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार जिन अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई की जाएगी वे गृह, ऊर्जा, नियुक्ति, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और आबकारी विभाग के हैं।
“सेवारत अधिकारियों को निलंबित कर दिया जाएगा और उनके खिलाफ़ विभागीय जांच शुरू की जाएगी। सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी”,प्रवक्ता ने कहा कि इन अधिकारियों को प्रथम दृष्टया विसंगतियों और लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाया गया हैं।
जिन अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा उनमें सुशील यादव (अग्निशमन अधिकारी), योगेंद्र प्रसाद (अग्निशमन अधिकारी-द्वितीय), गृह विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी विजय कुमार सिंह शामिल हैं; सहायक निदेशक (विद्युत सुरक्षा) विजय कुमार राव, कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार मिश्रा, ऊर्जा विभाग से अनुमंडल पदाधिकारी राजेश कुमार मिश्रा); पीसीएस अधिकारी महेंद्र कुमार मिश्रा (तब एलडीए में विहित अधिकारी)।
निलंबित किए जाने वाले अन्य एलडीए अधिकारियों में तत्कालीन सहायक अभियंता राकेश मोहन, कनिष्ठ अभियंता जितेंद्र नाथ दुबे, कनिष्ठ अभियंता रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, कनिष्ठ अभियंता जयवीर सिंह और एक अन्य अधिकारी राम प्रताप शामिल हैं।
आबकारी विभाग में लखनऊ के तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी संतोष कुमार तिवारी, लखनऊ में आबकारी निरीक्षक सेक्टर -1 अमित कुमार श्रीवास्तव और लखनऊ संभाग के उप आबकारी आयुक्त जैनेंद्र उपाध्याय के खिलाफ़ कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
कार्रवाई का सामना कर रहे सेवानिवृत्त अधिकारियों में मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभयनाथ पांडेय, एलडीए के कार्यकारी अभियंता अरुण कुमार सिंह, कार्यकारी अभियंता ओम प्रकाश मिश्रा और कनिष्ठ अभियंता गणेशी दत्त सिंह शामिल हैं।
सूत्रों ने कहा कि दो सदस्यीय जांच पैनल ने कथित तौर पर कई विभागों के अधिकारियों को अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं करने के लिए जिम्मेदार ठहराया क्योंकि होटल – लेवाना सूट – आवश्यक कागजी कार्रवाई को पूरा किए बिना पिछले पांच वर्षों से चालू था।
हजरतगंज के व्यावसायिक केंद्र स्थित लेवाना सूट में सोमवार की सुबह आग लगने से दो महिलाओं सहित चार मेहमानों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए।
पुलिस ने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है – दो होटल मालिक रोहित अग्रवाल और चचेरे भाई राहुल अग्रवाल और होटल प्रबंधक सागर श्रीवास्तव।
उन पर आईपीसी की धारा 304 (लापरवाही से मौत) और 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया हैं।
आग लगने के बाद, एलडीए ने लेवाना सूट को सील कर दिया जब प्रारंभिक जांच में पाया गया कि होटल का नक्शा स्वीकृत नहीं था, और फिर भी होटल पिछले पांच वर्षों से चल रहा था।
एलडीए ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि इस साल 26 मई को उसके जोनल ऑफिसर ने लेवाना सूट के मालिकों को नोटिस जारी कर होटल का नक्शा जमा करने को कहा था।
कोई जवाब नहीं मिलने पर एलडीए ने इसी साल 28 अगस्त को दूसरा नोटिस जारी किया। दूसरा नोटिस उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत जारी किया गया था।
मामले की सुनवाई अभी चल रही हैं। इसी तरह, जांच दल ने पाया कि अग्निशमन विभाग ने होटल में अग्नि सुरक्षा प्रबंधन की कमी के बावजूद अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया था।
होटल के मालिकों और प्रबंधक के खिलाफ प्राथमिकी में पुलिस ने कहा कि उन्होंने अप्रिय स्थिति में लोगों के बाहर निकलने की उचित व्यवस्था नहीं की।
“इमारत का बिजली कनेक्शन गैर-जिम्मेदार तरीके से किया गया था और गैस सिलेंडर रखने की कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं थी… चूंकि होटल की इमारत के सामने लोहे की ग्रिल थी, इसलिए लोग अंदर फंस गए।
लोगों को बचाने के लिए अग्निशामकों को इमारत में प्रवेश करने के लिए लोहे की ग्रिल काटनी पड़ी, ”एफआईआर में कहा गया हैं।
आग लगने का कारण भूतल पर होटल के किचन में शार्ट-सर्किट का होना माना जा रहा है, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने पहले कहा था कि लोगों की मौत दम घुटने से हुई हैं।
