देश में सबकी निगाहें 10 मार्च पर टिकी हैं, क्योंकि कल देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हों जाएंगे। इन नतीजों का असर साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा, क्योंकि दिल्ली का रास्ता यूपी की राजनीति से होकर गुजरता है।
ऐसे में सभी के मन में एक सवाल है कि यूपी की सीट कौन लेगा। सभी एग्जिट पोल भविष्यवाणी करते हैं कि सत्ता की चाबी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास रहेगी। अगर ऐसा होता है तो इस बार यूपी में कई सालों से चल रहे कई मिथक टूट जाएंगे।
पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद योगी अपनी पार्टी को फिर से सत्ता में लाएंगे। ऐसा करने वाले वह पहले मुख्यमंत्री होंगे। लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने वाले बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री होंगे।
योगी बने तो 2007 के बाद सीएम उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले वह पहले नेता होंगे। वर्ष 1951 से वर्ष 2007 तक राज्य में अस्थिरता का दौर जारी रहा। इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई और मायावती पांच साल तक मुख्यमंत्री रहीं।
लेकिन वह साल 2012 में वापसी नहीं कर सकीं। 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की वापसी हुई और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने। मायावती के बाद अखिलेश ने भी पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया, लेकिन वह भी सत्ता में नहीं लौटे और 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 325 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया।
इसके बाद पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को सत्ता के शीर्ष पर बिठा दिया। योगी ने अपना पांच साल का कार्यकाल भी पूरा कर लिया। अब देखना यह होगा कि योगी दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच पाते हैं या नहीं। कहा जाता है कि जो कोई भी नोएडा आता है, मुख्यमंत्री फिर से सत्ता में नहीं लौट सकते।
लेकिन सीएम योगी ने अपने पांच साल के कार्यकाल में कई बार नोएडा का दौरा किया इस मिथक को नजरअंदाज करते हुए उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा। दरअसल, 1988 के बाद से यह माना जाता है कि नोएडा का दौरा करने वाला कोई भी मुख्यमंत्री अगली बार सत्ता में नहीं लौटा।
राजनाथ सिंह जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने दिल्ली से नोएडा में बने फ्लाईओवर का उद्घाटन किया। अब यह जानने की दिलचस्पी बढ़ गई है कि नोएडा गए सीएम योगी मुख्यमंत्री बनकर इस मिथक को तोड़ेंगे या नहीं।
