चीन भारत में घुसपैठ का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है चाहे वह बॉर्डर का रास्ता हो या डिजिटल वारफेयर का. ऐसा ही एक खुलासा इंडिया एक्सप्रेस अखबार ने किया है. अखबार के मुताबिक चीन अपनी कंपनियों के ज़रिये भारत के VVIP लोगों की जासूसी करवा रहा है. इस सूचि में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया से लेकर अलग-अलग प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के बड़े-बड़े नेताओं के नाम शामिल है. अखबार के मुताबिक ऐसे करीब 10 हज़ार लोगों पर चीन निगरानी रख रहा है.
इसमें न सिर्फ राजनैतिक और सरकारी प्रतिष्ठानों के प्रभावी लोग, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के तय लोगों की निगरानी की जा रही है। इनमें प्रमुख पदों पर बैठे ब्यूरोक्रेट्स, जज, साइंटिस्ट्स, शिक्षाविद, पत्रकार, एक्टर्स, खिलाड़ी, धार्मिक लोग और एक्टिविस्ट शामिल हैं। इतना ही नहीं वित्तीय अपराध, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, और मादक पदार्थों, सोने, हथियारों या वन्यजीवों की तस्करी के सैकड़ों अभियुक्त भी इनमें शामिल हैं।
अखबार के अनुसार चीन ये जासूसी दो कंपनियों शेनझेन इंफोटेक और झेन्हुआ इंफोटेक के द्वारा करवा रहा है. चीन ने पूरी प्रक्रिया को ‘हाईब्रीड वारफेयर’ का नाम दिया है. हालाँकि इस पूरे खुलासे पर अभी तक चीन की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने दिल्ली स्थित चीनी दूतावास से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया लेनी चाही मगर उन्हें वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला. आपको बतादें की भारत की सरकार जासूसी का आरोपों को चलते पहले ही टिकटॉक सहित 100 से अधिक चीनी ऐप्स पर प्रतिबन्ध लगा चुकी है.
