भारत बंद की क्या रही उपलब्धि, नेताओं पर हुए हमले या राजनीतिक दलों की बढ़ती बेचैनी?

हिंसा गलत है लेकिन जिस तरह बिहार में पप्पू यादव और श्याम रजक आज भीड़ के हमले का शिकार हुए। यह सही नही लेकिन यह सोचना होगा कि यह स्थिति क्यों बनी? कौन है जिम्मेदार? इससे पहले एमपी और राजस्थान में भी कई जगह से बड़े नेताओं पर हमले की खबर आ चुकी है। राजनीति बदलेगी, बदलनी पड़ेगी। यही वक़्त की नजाकत है। खैर नजारे हम क्या देखें और दिखाएं यह तो 2019 में ही पता लगेगा।

क्या फिल्मों से बढ़ रहा है आत्महत्या का दौर?

भले ही फ़िल्म शुरू होने से पहले यह लिखा जाता हैं कि इस फ़िल्म के सारे पात्र और घटनाएं काल्पनिक हैं इसके बावजूद लोग इसे सच मानते हैं या यकीन कर लेते हैं।