आईएएस और आईपीएस बनने के ख्वाब में जान गंवा रहे युवा

इससे सब की साख जुड़ी होती है। यही वजह भी है कि हर विद्यार्थी के मन मे हर माँ-बाप के मन मे एक बार यह सवाल जरूर आता है कि उसे आईएएस बनना है या बनाना है।

क्या फिल्मों से बढ़ रहा है आत्महत्या का दौर?

भले ही फ़िल्म शुरू होने से पहले यह लिखा जाता हैं कि इस फ़िल्म के सारे पात्र और घटनाएं काल्पनिक हैं इसके बावजूद लोग इसे सच मानते हैं या यकीन कर लेते हैं।