बीजेपी ने लोकसभा के लिए खेला सबसे बड़ा दांव, कांग्रेस में हड़कंप

2019 लोकसभा की बात करें तो कांग्रेस अलग थलग है लेकिन दम्भ भर रही है, वहीं क्षेत्रीय दल भी सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने का ख्वाब बुन रहे हैं।

बीजेपी पर बरसे उद्धव

यह कोई पहला मौका नही जब उद्धव इस तरह बीजेपी के खिलाफ बोलते नजर आए है। इससे पहले भी शिवसेना के मुखपत्र सामना में अपने संपादकीय के माध्यम से वहः कई बार सरकार के खिलाफ लिख कर बीजेपी को असहज स्थिति में डाल चुके हैं।

भारत बंद की क्या रही उपलब्धि, नेताओं पर हुए हमले या राजनीतिक दलों की बढ़ती बेचैनी?

हिंसा गलत है लेकिन जिस तरह बिहार में पप्पू यादव और श्याम रजक आज भीड़ के हमले का शिकार हुए। यह सही नही लेकिन यह सोचना होगा कि यह स्थिति क्यों बनी? कौन है जिम्मेदार? इससे पहले एमपी और राजस्थान में भी कई जगह से बड़े नेताओं पर हमले की खबर आ चुकी है। राजनीति बदलेगी, बदलनी पड़ेगी। यही वक़्त की नजाकत है। खैर नजारे हम क्या देखें और दिखाएं यह तो 2019 में ही पता लगेगा।

सड़क से सोशल मीडिया तक मचा राजनीतिक बवाल, क्या अब लद रहा दलित राजनीति का वक़्त ?

इस राजनीति की धुरी में कोई एक दल फिलहाल नही है लेकिन इतना तय है कि अगर राजनीति में विरोध का नया स्वर बुलंद हुआ तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान वर्तमान में बीजेपी को होगा। इसके पीछे वजह खास है, वह वजह है कि विरोध बीजेपी का वोट बैंक माने जाने वाले स्वर्ण समाज की तरफ से है।

वीपी सिंह और राजीव गांधी की गलती दोहरा रहे हैं पीएम मोदी, क्या होगा इसका अंजाम ?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट में हुए बदलाव पर अध्यादेश लाकर उसे रद्द करना। यह अध्यादेश अब मोदी सरकार के लिए जी का जंजाल बनता नजर आ रहा है। यही वजह है कि अब सोशल मीडिया सहित राजनीतिक जानकारों के बीच इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या मोदी ने भी जल्दबाजी में कुछ ऐसा फैसला ले लिया और गलती कर दी जो वीपी सिंह और राजीव गांधी जैसे प्रधानमंत्री कर चुके थे?

क्या आत्महत्या के मामलों में आर्थिक मदद देने पर रोक लगनी चाहिए?

वास्तविकता की बात करें तो आत्महत्या में भारत सबसे आगे है और यहां हर घंटे, हर मिनट का आंकड़ा विनाशकारी है। ऐसे में अगर आर्थिक लाभ देने की कोई नीति बन जाये तो भी अनुमानतः अलग से इसके लिए एक फंड बनाना पड़ेगा।

मालदीव में क्यों सैन्य कार्रवाई से बच रहा भारत, क्या है मजबूरी और वजह?

भारत फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थित में ही खुद को बेहतर मान रहा है। सैन्य टुकड़ियों को तैयार रखा जरूर है लेकिन सीधी कार्रवाई से बचना चाहता है।

बलात्कार के मामले में फांसी से क्यों इतनी दूरी, क्या है राजनीतिक मजबूरी

यह समझ से बिल्कुल परे है कि आखिर सरकार की कौन सी वह राजनीतिक मजबूरी है जिसकी वजह से ऐसे गंभीर अपराध में फांसी के प्रावधान से सरकार बचती रही है।

म्यांमार से क्यों भगाए जा रहे हैं रोहिंग्या,बांग्लादेश भी परेशान

म्यांमार और बांग्लादेश के स्थानीय निवासियों से पूछा गया कि इन्हें क्यों निकाला जा रहा है दिक्कत क्या है तो उन्होंने कहा पहले ये शरण और सहारा मांगते हैं बाद में लूट मार और कब्ज शुरू कर देते हैं।