किसान आंदोलन थमा नहीं, अब जाट आरक्षण की फिर जोर पकड़ रही मांग; भाजपा की बढ़ सकती है परेशानी

लखनऊ में विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों में कुछ गुस्सा शांत हो सकता है, लेकिन विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह खुद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में ज्वार को मोड़ने की संभावना नहीं है।

बिहार या झारखंड किसी एक ही राज्य में मिलेगा आरक्षण का लाभ, जानें

आरक्षण के लाभ के ऊपर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि आरक्षित श्रेणी का व्यक्ति बिहार या झारखंड किसी भी राज्य में लाभ का दावा कर सकता है लेकिन नवंबर 2000 में पुनर्गठन के बाद दोनों राज्यों में एक साथ आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।

बिहार चुनाव: मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने आरक्षण को लेकर दिया बड़ा बयान, कहा ‘आबादी के हिसाब से लोगों को मिले आरक्षण’

आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर नितीश कुमार का बयान आया है जिससे बिहार की राजनीति में उबाल आना तय है. वाल्मीकि इलाके में एक चुनावी सभा को सम्भोदित करते हुए नितीश कुमार ने कहा की आबादी के हिसाब से लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए. जिसकी जितनी आबादी उतना आरक्षण.

भारत बंद की क्या रही उपलब्धि, नेताओं पर हुए हमले या राजनीतिक दलों की बढ़ती बेचैनी?

हिंसा गलत है लेकिन जिस तरह बिहार में पप्पू यादव और श्याम रजक आज भीड़ के हमले का शिकार हुए। यह सही नही लेकिन यह सोचना होगा कि यह स्थिति क्यों बनी? कौन है जिम्मेदार? इससे पहले एमपी और राजस्थान में भी कई जगह से बड़े नेताओं पर हमले की खबर आ चुकी है। राजनीति बदलेगी, बदलनी पड़ेगी। यही वक़्त की नजाकत है। खैर नजारे हम क्या देखें और दिखाएं यह तो 2019 में ही पता लगेगा।

सड़क से सोशल मीडिया तक मचा राजनीतिक बवाल, क्या अब लद रहा दलित राजनीति का वक़्त ?

इस राजनीति की धुरी में कोई एक दल फिलहाल नही है लेकिन इतना तय है कि अगर राजनीति में विरोध का नया स्वर बुलंद हुआ तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान वर्तमान में बीजेपी को होगा। इसके पीछे वजह खास है, वह वजह है कि विरोध बीजेपी का वोट बैंक माने जाने वाले स्वर्ण समाज की तरफ से है।

वीपी सिंह और राजीव गांधी की गलती दोहरा रहे हैं पीएम मोदी, क्या होगा इसका अंजाम ?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट में हुए बदलाव पर अध्यादेश लाकर उसे रद्द करना। यह अध्यादेश अब मोदी सरकार के लिए जी का जंजाल बनता नजर आ रहा है। यही वजह है कि अब सोशल मीडिया सहित राजनीतिक जानकारों के बीच इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या मोदी ने भी जल्दबाजी में कुछ ऐसा फैसला ले लिया और गलती कर दी जो वीपी सिंह और राजीव गांधी जैसे प्रधानमंत्री कर चुके थे?

शाह,मोदी के साथ बीजेपी के लिए सरदर्द बना यह मुद्दा, विपक्ष खुश

देश मे इन दिनों अजीब माहौल है। असली मुद्दे गौण हैं और ऐसे मुद्दे चर्चा में हैं जो समझ से ही परे हैं। कहीं जातीय उन्माद है, कहीं धार्मिक उन्माद है तो कहीं आरक्षण के विरोध और समर्थन में हल्ला बोल है।