न ही उनके लिए पर्याप्त साधन की सुविधाएं थी, न ही खाने की वयस्था थी और न ही मेडिकल की. इसके चलते न जाने कितने प्रवासी मज़दूरों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था.