अखलाक की मौत पर दादरी जाने वाले और ताहिर हुसैन जैसे दंगाइयों का साथ देने वाले केजरीवाल के मुंह से इन हत्याओं पर मुआवजा तो दूर सांत्वना के एक शब्द न निकले।