पूर्व केंद्रीय मंत्री और हाल ही में राजद से इस्तीफा देने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह का आज निधन हो गया। वह पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे। वह कोरोना को मात देकर तो ठीक हो गए लेकिन अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के सामने आने के बाद 4 अगस्त को उन्हें नई दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था। पिछले 4-5 दिनों से उनकी स्थिति ज्यादा बिगड़ गई थी जिसके बाद उन्हें वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखा गया था।
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रघुवंश प्रसाद सिंह का निधन, हाल ही में दिया था राजद से इस्तीफा
पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह का आज नई दिल्ली के अखिल भारतीय अयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से लगातार बीमार चल रहे थे। उनका इलाज पहले पटना एम्स में हुआ और बाद में उन्हें दिल्ली एम्स में दाखिल कराया गया था। उन्हें सांस लेने संबंधी तकलीफ थी। पिछले कुछ दिनों से वह वेंटीलेटर सपोर्ट पर थे।
बिहार- जेपी नड्डा ने आत्मनिर्भर बिहार का दिया नारा, तेजस्वी बोले- पहले उधार के चेहरे को छोड़ बीजेपी तो आत्मनिर्भर बने…
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा आज बिहार की राजधानी पटना पहुंचे। यहां उन्होंने बिहार चुनावों से पहले आत्मनिर्भर बिहार अभियान की शुरुआत करते हुए नया नारा दिया जन-जन की पुकार आत्मनिर्भर बिहार। इसके अलावा उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात भी की है। माना जा रहा है कि सीट बंटवारे के फार्मूले पर चर्चा के लिए यह बैठक हुई है। इससे पहले अपने संबोधन में नड्डा ने जहां पीएम मोदी की तारीफ की वहीं राज्य सरकार की उपलब्धियां भी गिनाई।
बिहार चुनाव- सीट बंटवारे की उहापोह से परेशान दल, संभावित उम्मीदवारों में भी संशय की स्थिति
कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार विधानसभा चुनाव अपने तय समय पर होंगे। इन चुनावों को लेकर दल और उनके नेता अपनी कमर कसने में कोई कोर कसर नबी छोड़ना चाहते हैं। बागियों को सहारा देने से न तो परहेज़ है न रूठे यारों को मनाने से लेकिन उस बीच एक संकट ऐसा है जो हर दल और गठबंधन के नेताओं में आम है।
दिल्ली एम्स से रघुवंश प्रसाद सिंह ने रांची रिम्स में भेजा लालू को अपना इस्तीफा, तबियत भी बिगड़ी
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को बिहार विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा झटका लगा है। पार्टी के सबसे बड़े स्वर्ण चेहरे और तीन दशक से भी ज्यादा लंबे वक्त तक लालू के सबसे विश्वासी सहयोगी रहे रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले भी उनके इस्तीफा देने की खबर थी लेकिन तब राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव ने इसे स्वीकार नही किया था।
इस दिन हो सकता है बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान, कोरोना काल मे चुनाव कराने वाला पहला राज्य होगा
बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर सत्तापक्ष की जिद्द और विपक्ष की चुनाव न कराने की मांग के बीच अगले एक दो दिनों में चुनावों की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। कोरोना संकट के बीच बिहार ऐसा पहला राज्य होगा जहां चुनाव होंगे। माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग 13 सितम्बर को तारीखों का ऐलान कर सकता है। यह अनुमान इसलिए लगाए जा रहे क्योंकि वर्तमान विधानसभा के चुनावी तारीखों का ऐलान भी 9 सितम्बर को हुआ था।
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बिहार विधानसभा चुनावों की बिसात बिछने लगी है। नफा-नुकसान का आकलन शुरु हो गया है। इसी के साथ पहले शुरु हुआ नेताओं के पाला बदलने का खेल, फिर हुआ दल बदलने का खेल और अब शुरू है आरोप-प्रत्यारोप का दौर। आरोप प्रत्यारोप भी अगर सत्ता पक्ष और महागठबंधन के बीच हो तो शायद इसमें कुछ नया नही माना जाता लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है कि तर्ज पर पहले जहां मांझी, नीतीश के साथ आ मिले वहीं एनडीए के पुराने पार्टनर लोजपा ने मोर्चा खोल दिया।
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बिहार चुनावों को लेकर वक़्त जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे दलों और नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार मोर्चा संभाले नजर आ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी आरोपों के तीर जदयू की तरफ हर दिन चला रहे हैं। आज पहले जहां तेजस्वी ने नीतिश पर हमला बोलते हुए दस सवाल पूछे थे वहीं अपनी पहली डिजिटल रैली के माध्यम से नीतीश ने अब पलटवार किया है।
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बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर अब दल और नेता सक्रिय नजर आने लगे हैं। समीकरण साधने के लिए क्या दुश्मन क्या दोस्त सब जायज है। कहीं रूठे यारों को मनाने का क्रम जारी है तो कहीं पाला बदल सुरक्षित हो जाने की जद्दोजहद है वहीं हमेशा की तरह सत्ता पक्ष के तरकश में शिलान्यास, उद्घाटन के साथ हर वर्ग को लुभाने के लिए कुछ न कुछ वादे हैं।
मांझी के बाद एमपी के इस नेता को साथ करने में लगे हैं नीतीश, 2018 में तोड़ गए थे नाता
आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के बीच कोई भी दल या नेता किसी भी तरह का कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहता है। यही वजह है कि वोट बैंक और जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए चुनावी समीकरण के हिसाब से लाभ-हानि का गणित लगाया जा रहा है। इसी क्रम में जीतन राम मांझी जहां अब नीतीश कुमार के साथ हैं वहीं अब एक और बड़े नेता को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ चली है।
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बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर गहमागहमी बढ़ गई है। इसी के साथ बढ़ी है बयानबाजी भी और पाला बदलने का दौर भी शुरू हो चुका है। कल तक महागठबंधन के साथ रहे हिंदुस्तान आवाम मोर्चा सुप्रीमो जीतनराम मांझी अब खुलकर एनडीए के साथ हैं और नीतीश के सपोर्ट में जोरदार बैटिंग करते नजर आ रहे हैं। वहीं लोजपा और चिराग के बयान से यह भी बहुत साफ हो रहा कि शायद एनडीए में सब ठीक नही है।
बिहार चुनावों को लेकर पप्पू यादव हुए एक्टिव, रघुवंश सिंह और पुतुल सिंह को दिया यह ऑफर
जन अधिकार पार्टी सुप्रीमों पप्पू यादव बिहार चुनावों के मद्देनजर एक्टिव नजर आने लगे हैं। पिछपे साल जब पटना डूबा तब से लेकर इस साल उत्तर बिहार में आई बाढ़ तक राजनीति में अगर कोई नाम सबसे आसानी से और ज्यादा लोगों की जुबान पर चढ़ा तो वह नाम पप्पू यादव का ही था। वह निर्भीक रूप से सत्ता और मुख्य विपक्षी दल के खिलाफ अब ताल ठोकते नजर आ रहे हैं।
बिहार में राजद-जदयू का खेल खराब कर सकते हैं यह दल, पढ़ें
बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच दल और इसके नेता अब एक्टिव नजर आने लगे हैं। यूँ तो यह माना जा रहा है कि सत्ता की मुख्य लड़ाई राजद की अगुवाई वाली महागठबंधन और नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन के बीच ही होगी। हालांकि इससे इनकार नही किया जा सकता कि कई छोटे दलों की मौजूदगी इस खेल को खराब करने का माद्दा रखती है।
बिहार- एनडीए की नाव पर सवार होते ही लालू पर मांझी का तंज, कहा- मेरा बेटा एमए पास
बिहार विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पाला बदलने का खेल जारी है। क्या दल और क्या नेता सब अपने लिए सुरक्षित पनाह ढूंढने में लगे हैं। इसी क्रम में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की अगुवाई वाली हिंदुस्तान अवाम मोर्चा एनडीए के हिस्सा बन चुकी है। महागठबंधन छोड़ने के बाद एनडीए में शामिल होने का एलान करने वाले जीतन राम मांझी ने इस अवसर पर लालू और उनके पुत्र तेजस्वी यादव पर जोरदार हमला बोला है।
लालू से मुलाकात करनी अब होगी मुश्किल, जानें क्यों?
झारखंड राजधानी रांची में अपनी सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव से अब नेताओं की होने वाली मुलाकात मुश्किल भरी हो सकती है। पहले की तरह अब जाकर उनसे मिल लेना शायद संभव न हो पाए। ऐसा हुआ है प्रशासन के उस आदेश से जिसमे कहा गया है कि अन्य प्रदेशों से आने वाले लोगों को अनिवार्य तौर पर 14 दिन की क्वारंटाइन अवधि पूरी करनी होगी। हालांकि इसमें यह जोड़ा गया है कि अगर प्रशासन से संपर्क नही किया गया तो क्वारंटाइन किया जाएगा।
