सरदार वल्लभ भाई पटेल गृह मंत्री और बड़े नेता रहे, उन्होंने अलग-अलग रियासतों में बँटे देश को एक किया, उप-प्रधानमंत्री भी बने लेकिन कभी पीएम न बन सके, अब सवाल यह है कि इतने बड़े नेता, इतना बड़ा काम और सम्मान सब था फिर ऐसा क्यों हुआ?
कश्मीर में तिरंगे का अपमान होता रहा, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते रहे,सेना सीमा की हिफाज़त में अपनी कुर्बानी देती रही लेकिन एक उचित आदेश तक सरकार से तामिल न हो सका जिसमें यह लिखा हो कि सेना अपने हिसाब से इस तरह की घटनाओं से निपट ले।
सेना मुश्किल हालातों का सामना करते हुए भी मोर्चा थामे रहती है लेकिन न तो पाक की नापाक हरकतों के खिलाफ उन्हें कार्रवाई की खुली छूट दी जाती है न ही उचित संसाधन उपलब्ध हैं।
अमेरिका और अन्य देशों के सामने पाकिस्तान के खिलाफ बोलने से ऐसे हमले रुकेंगे? क्या पाकिस्तान को आतंकी देश भर घोषित करने से काम हो जाएगा? क्या संयुक्त राष्ट्र में लंबे चौड़े ताली बटोरने वाले भाषण के भरोसे कश्मीर में शांति लौटेगी?