विरोधियों को छोड़िये अब सहयोगी भी नही दे रहे बीजेपी-कांग्रेस को भाव

कांग्रेस को कोई भी क्षेत्रीय दल तवज्जो देता नही दिख रहा और बीजेपी किसी अन्य दल को अपने सामने तवज्जो दे उनका ग्राफ बढ़ाना नही चाहती है। यही वजह है कि हर जायज-नाजायज मांग मानने के बदले बीजेपी ने डिफेंड करना ही सही समझा है।

कभी विपक्ष की धुरी रही कांग्रेस अलग-थलग पड़ रही है, पढ़ें कैसे

क्षेत्रीय दलों के मन मे यह डर भी है कि कांग्रेस की स्वीकार्यता अभी भी 2014 जैसी ही है अजर मुमकिन है कि लोगों का समर्थन मोदी विरोध का बावजूद उसे न मिले।

क्या हुआ तेरा वादा, यह मोदी से क्यों नही पूछता विपक्ष?

भारत के लोकतंत्र में जिस तरह 2014 में मोदी सरकार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई और विपक्ष सिमटता चला गया वैसे में न सिर्फ सरकार निरंकुश हुई बल्कि विपक्ष भी कमजोर ही हुआ।

सहयोगी दल ही कहीं डूबा न दें बीजेपी की नाव

आंध्रप्रदेश में टीडीपी, महाराष्ट्र में शिवसेना ने बीजेपी के खिलाफ पहले ही मोर्चा खोल रखा है। विपक्ष अलग लामबंद हो मोदी को हराने की जुगत में भिड़ा है।

30 साल में 7 वीं बार हो रही विपक्षी एकता की बात, इस बार आवाज़ दक्षिण से आई है

इस बार यह मुद्दा उठाया है दक्षिण के तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने और तो और कुछ दलों ने उनके बयान के बाद आश्वासन और स्वीकृति तक दे दी है।

क्या तय समय से पहले हो सकते हैं लोकसभा चुनाव, जानें क्या है सच

खबरों के मुताबिक अप्रैल में एलान हो सकते हैं। जी नही ऐसा अब इस माहौल में नही होगा जब कि बीजेपी अपने सहयोगियों और विपक्ष से घिरी हुई है। पहले ऐसा एलान इसलिए संभव था क्योंकि मोदी लहर फीकी पड़ने से पहले मोदी और बीजेपी यह मौका भुना लेना चाहते थे।

राष्ट्रपति ने पांच राज्यों में कि राज्यपाल कि नियुक्ति

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आज पाँच राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा अंडमान निकोबार में उप-राज्यपाल की नियुक्ति के आदेश भी जारी हुए हैं।

बिहार में बहार है,भ्रष्टाचार अपरम्पार है

खबर के मुताबिक बिहार के भागलपुर में एक बाँध उद्घाटन से पहले ही टूट गया है और आश्चर्य कि बात यह है कि दिनांक 20 सितम्बर को खुद बिहार में बहार के मुखिया नितीश कुमार जी इसका उद्घाटन करने वाले थे.

बिहार में राजनीतिक बदलाव की बयार,महागठबन्धन में बढ़ रही है दरार

राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को नीतीश कुमार द्वारा समर्थन देने बाद से महागठबंधन में तल्खी का दौर जारी है।

रामजस विवाद में कौन गलत कौन सही?जानें विवाद की पूरी कहानी

21 फरवरी को दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में एक सेमिनार से दो सदस्यों का नाम हटाने को लेकर शुरू हुआ विरोध अब एक अलग ही मोड़ ले चुका है। दरअसल इस सेमिनार में जेएनयू में पिछले वर्ष हुए राष्ट्र विरोधी प्रदर्शन के आरोपी उमर खालिद और सेहला रशीद को आमंत्रित किया गया था।