बीजेपी आपरेशन आल आउट की हिमायती थी जबकि पीडीपी इसे बंद करने की पैरोकारी में लगी थी। बीजेपी के शासन वाली केंद्र सरकार रमजान के बाद सीजफायर को खत्म करना चाहती थी जबकि महबूबा इसके खिलाफ थीं।