सवाल यह है कि क्या जो जिंदगी भगवान ने हमे दी है उसे हम अपनी मर्जी से खत्म कर कुदरत के नियमों के विपरीत नही जा रहे? क्या हमें समस्याओं से लड़ना नही सीखना चाहिए? क्या मौत को मात देने के बदले यह ज्यादा आसान है?