राहुल के सामने बतौर अध्यक्ष हैं यह बड़ी चुनौतियां, इनसे पार पा गए तो मोदी पर पड़ेंगे भारी

राहुल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की छवि के साथ अपनी छवि को सुधारना है। कार्यशैली में बदलाव लाना है क्योंकि कांग्रेस आज भी नेहरू इंदिरा वाली कांग्रेस है इसमें कुछ भी नयापन नजर नही आता।

जब माणिक और मनमोहन की सरकार नही बची, तो कुछ भी सम्भव

राजनीति में एक व्यक्ति की ईमानदारी से फर्क नही पड़ता लेकिन एक व्यक्ति की बेईमानी का खामियाजा पूरे दल को भुगतना पड़ता है। इसके दो उदाहरण हैं।

दिल्ली के बाद मुम्बई में छात्रों का बड़ा प्रदर्शन, कांग्रेस ने दिया समर्थन

रेलवे में नौकरी देने की मांग को लेकर मुम्बई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन की पटरियों पर उतर आए हैं। इन छात्रों की मांग है कि इन्हें अप्रेंटिस की जॉब दी जाए।

चुनावी चक्रव्यूह तीनों तरफ से है लेकिन फंसेगा कौन?

राजनीति के महारथी अभी से अपने अपने दायरे बनाने में और दूसरों के लिए चक्रव्यूह की रचना करने में लगे हैं। हर तरफ से अपने मुताबिक एक परिधि बनाई जा रही है ताकि खुद को सुरक्षित रख कर दूसरों का मुकाबला किया जा सके। यह परिधि कुछ और नही मुद्दे हैं।

प्रशांत किशोर की मोदी से मुलाकात, क्या फिर संभालेंगे प्रचार की कमान?

प्रशांत किशोर ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने बीजेपी के प्रचार की कमान संभाल रखी थी और ब्रांड मोदी की सुनामी पूरे देश मे खड़ी कर दी थी। अब प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं। चर्चा में होने की वजह कुछ दिनों पहले पीएम से हुई उनकी मुलाकात है।

पढ़ें पीएम पर राहुल के पांच सबसे बड़े आरोप

राहुल गांधी ने बतौर अध्यक्ष कांग्रेस के अधिवेशन के समापन सत्र को संबोधित किया इस दौरान वह लगातार मोदी सरकार और बीजेपी के साथ आरएसएस पर हमलावर रहे और जमकर शब्दबाण चलाये।

क्षेत्रीय दलों से भी दूर हो रहे राहुल, कैसे देंगे मोदी को टक्कर?

राहुल ने एक और महत्वपूर्ण बात कही कि अगर मोदी सरकार को हटाने और बीजेपी को हराने के लिए गठबंधन भी करना पड़े तो भी वह पीछे नही हटेंगे।

2019 से पहले एक दांव जरूर चलेंगे मोदी-शाह

मोदी सरकार आज कई मोर्चों पर घिरी है। विपक्ष हमलावर है, नौजवान और किसान सड़क पर उतर प्रदर्शन करने में लगे हैं, सीमा पार से आतंकवाद और सीमा के अंदर नक्सलवाद के मुद्दे भी सरकार के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं।

फेसबुक मुकाबला- मोदी के सामने कहाँ हैं राहुल

पीएम मोदी की तो फेसबुक पर पीएम मोदी को फॉलो करने वाले और उनके पेज को लाइक करने वालों की संख्या चार करोड़ बत्तीस लांख से ज्यादा है। वहीं दूसरी तरफ देखें तो राहुल गांधी को लगभग 16 लाख साठ हजार से कुछ ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

कर्नाटक में भगवान भरोसे कांग्रेस

कर्नाटक में भी मुद्दों की कमी होगी और हिंदुत्व का एजेंडा होगा। ऐसे में यह भी साफ है कि विरोधियों के निशाने पर रही कांग्रेस वहां भगवान भरोसे ही है।

तो क्या रोजगार के आंकड़ों को लेकर झूठ बोल रहे राहुल?

चार साल के अंदर 11 करोड़ लोग स्वरोजगार से जुड़े हैं। क्या यह आंकड़ा उन्हें नही पता? मोदी सरकार ने मुद्रा योजना के तहत यह स्वरोजगार पैदा किये हैं

मोदी- शाह के निशाने पर अब कांग्रेस और राहुल नही यह हैं

तीसरे मोर्चे की कवायद में कांग्रेस पूरी तरह तटस्थ है, उसका जनाधार भी खिसकता नजर आया है ऐसे में बीजेपी भी यह मान कर चल रही है कि कांग्रेस से ज्यादा खतरा के क्षेत्रीय गठबंधन और तीसरे मोर्चे से है।

क्या आतंक, पाक और परमाणु से रथ और यज्ञ भरोसे जीतेगी बीजेपी, यह कैसा डिजिटल इंडिया

डिजिटल इंडिया की बात करने वाली सरकार ऐसे यज्ञ के आयोजन की अगुवा बनेगी तो सवाल उठने लाजमी भी हैं. क्या सरकार ऐसे जवाब देगी? कैसे कड़ी कारवाई होगी? क्या सरकार के पास अब कोई मुद्दा और कारवाई का दमखम नहीं है?