शाह,मोदी के साथ बीजेपी के लिए सरदर्द बना यह मुद्दा, विपक्ष खुश

देश मे इन दिनों अजीब माहौल है। असली मुद्दे गौण हैं और ऐसे मुद्दे चर्चा में हैं जो समझ से ही परे हैं। कहीं जातीय उन्माद है, कहीं धार्मिक उन्माद है तो कहीं आरक्षण के विरोध और समर्थन में हल्ला बोल है।

जहां अशिक्षा है वहां आत्महत्या आम है लेकिन जहां शिक्षा है वहां भी हम बदनाम है?

अशिक्षा, गरीबी और जागरूकता आत्महत्या की वजह हैं लेकिन जो आत्महत्या के आंकड़े शहरों से तथाकथित पढ़े-लिखे वर्ग से आ रहे हैं वहां ऐसा क्यों है?