ब्रेकिंग- सुशांत सिंह राजपूत केस की CBI जांच के बीच इस बड़े एक्टर ने किया सुसाइड

समीर शर्मा टीवी धारावाहिक ये रिश्ते हैं प्यार के, क्योंकि सास भी कभी बहु थी, कहानी घर-घर की जैसे कई लोकप्रिय धारावाहिकों में काम कर चुके थे।

उद्योग की आड़ में खो रहे किसान

पूंजीपतियों और सरकार की मिलीभगत के आगे गरीब किसान की एक नही चलती और वह थक हार कर बैठ जाता है। साथ ही जब स्थित्ति बद से बदतर होती है तो उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नही होता।

यह अभिनेत्री अपनी बॉडी टाइप की वजह से हो गई थी डिप्रेशन का शिकार, आने लगे थे आत्महत्या के ख्याल

हम जिस अभिनेत्री की बात कर रहे हैं वह नाम है इलियाना डीक्रूज का, हाल ही में उन्होंने वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ मेन्टल हेल्थ में अपनी इस मनः स्थित्ति का खुलासा करते हुए कहा था कि वह अपने शरीर के बनावट को लेकर डिप्रेशन में चली गईं थी।

परीक्षा के मौसम में विद्यार्थियों के आत्महत्या का दौर दुखद

विद्यार्थी उम्मीदों का बोझ, पढ़ाई का बोझ उठाने में खुद को असमर्थ समझने लगते हैं और सफलता पाने की होड़ में पीछे छूट जाने के भय से, परिवार के डर से आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।

जब टीवी देखते-देखते 12 वीं मंजिल से कूद गया था संगीतकार

यह घटना मुम्बई की है। यहां बेंगलुरु के रहने वाले एक 29 वर्षीय संगीतकार जिसका नाम करण जोसेफ था ने अचानक दोस्तों के साथ टीवी देखते हुए 12 वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी।

क्या है आत्महत्या की परिभाषा?

आत्महत्या मन के भावों की वह प्रवृति है जब इंसान जीने की उम्मीदें छोड़ देता है। जब वह मान लेता है कि जिंदगी में कुछ हासिल नही हो सकता या मन टूट जाता है।

क्या आत्महत्या के मामलों में आर्थिक मदद देने पर रोक लगनी चाहिए?

वास्तविकता की बात करें तो आत्महत्या में भारत सबसे आगे है और यहां हर घंटे, हर मिनट का आंकड़ा विनाशकारी है। ऐसे में अगर आर्थिक लाभ देने की कोई नीति बन जाये तो भी अनुमानतः अलग से इसके लिए एक फंड बनाना पड़ेगा।

इन बच्चों में आत्महत्या का खतरा पांच गुना ज्यादा होता है

ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्विन्सलैंड में हुए एक शोध के मुताबिक 12 साल से कम उम्र के बच्चों में आत्मघाती कदम उठाने का विचार अन्य बच्चों की तुलना में पांच गुना ज्यादा होता है।

करियर की बुलंदियों पर रहते हुए इस अभिनेत्री ने की थी आत्महत्या, नाम था फटाफट

उनका यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि उन्होंने कमल हसन के साथ एक फ़िल्म की थी, इस फ़िल्म में उन्होंने कई बार फटाफट शब्द का प्रयोग किया था।

अशिक्षा और जागरूकता की कमी से भयावह हो रहे आत्महत्या के आंकड़े, पढ़ लें यह क्रूर सच्चाई

आपको जान कर हैरानी होगी, हमें लिखते हुए हो रही है कि अलग-अलग गाँव ऐसे हैं जहां लोग आज भी अपने जनप्रतिनिधि को नही जानते, अपने सीएम को नही पहचानते, योजनाओं की जानकारी नही है, कानून का आता पता नही है।

जहां अशिक्षा है वहां आत्महत्या आम है लेकिन जहां शिक्षा है वहां भी हम बदनाम है?

अशिक्षा, गरीबी और जागरूकता आत्महत्या की वजह हैं लेकिन जो आत्महत्या के आंकड़े शहरों से तथाकथित पढ़े-लिखे वर्ग से आ रहे हैं वहां ऐसा क्यों है?

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पैसे के लोभ में केमिस्ट बेच रहे मौत

आप किसी केमिस्ट की दुकान पर जाइये और उसे किसी भी सिरप या नींद की दवा का नाम बताइए हो सकता है वह पहले इनकार करे या ना नुकुर करे लेकिन जैसे ही आप उन्हें थोड़ा रिक्वेस्ट करेंगे या ज्यादा पैसे का आफर देंगे तो वह एक पल सोचे बिना आपको वह दवाइयां दे देगा।

वह अभिनेता जो किसानों, नौजवानों से कहता है आत्महत्या का ख्याल आए तो मुझसे मिलें

कुछ उदाहरण की बात करें तो पुरानी खबरों से गुजरते हुए एक खबर नजर के सामने आई जिसमे नाना के बारे में लिखा गया था कि वह कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों का हौसला बढ़ाने एक पोस्ट से दूसरे पोस्ट तक घूमे थे। वहीं किसान आत्महत्या पर काम करते हुए उन्होंने निजी रूप से सैकड़ों किसानों के लोन भरे या मदद मांग कर उनकी मदद की

आत्महत्या का आये ख्याल तो अपने आप से पूछें यह सवाल

सवाल यह है कि क्या जो जिंदगी भगवान ने हमे दी है उसे हम अपनी मर्जी से खत्म कर कुदरत के नियमों के विपरीत नही जा रहे? क्या हमें समस्याओं से लड़ना नही सीखना चाहिए? क्या मौत को मात देने के बदले यह ज्यादा आसान है?

आईएएस और आईपीएस बनने के ख्वाब में जान गंवा रहे युवा

इससे सब की साख जुड़ी होती है। यही वजह भी है कि हर विद्यार्थी के मन मे हर माँ-बाप के मन मे एक बार यह सवाल जरूर आता है कि उसे आईएएस बनना है या बनाना है।

क्या फिल्मों से बढ़ रहा है आत्महत्या का दौर?

भले ही फ़िल्म शुरू होने से पहले यह लिखा जाता हैं कि इस फ़िल्म के सारे पात्र और घटनाएं काल्पनिक हैं इसके बावजूद लोग इसे सच मानते हैं या यकीन कर लेते हैं।

पंखे से लटकी मिली थी इस खूबसूरत बंगाली अभिनेत्री की लाश

न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि क्षेत्रीय फ़िल्म इंडस्ट्री में भी आत्महत्या कर जान गंवा देने वाले अभिनेता और अभिनेत्रियों की एक लंबी फेहरिस्त है।

नई जिंदगी से परिचय कराने वाली कृतिका चौधरी हो गईं गुमनाम

मौके से मिले साक्ष्य भी यही इशारा कर रहे थे कि उन्होंने आत्महत्या की थी हालांकि पुख्ता तौर पर इसके बारे में बाद में कुछ भी निकलकर सामने नही आ सका।