प्यार पर पहरे के बाद यही चीज याद आती है. मुद्दे बदले, देश में कई बदलाव आये, हम आज़ाद हुए अधिकार मिले, आधुनिक हुए लेकिन जब बात धर्म,मजहब और जाति की आई तो राजनीति की आड़ में हम हैवान बन बैठे.
म्यांमार और बांग्लादेश के स्थानीय निवासियों से पूछा गया कि इन्हें क्यों निकाला जा रहा है दिक्कत क्या है तो उन्होंने कहा पहले ये शरण और सहारा मांगते हैं बाद में लूट मार और कब्ज शुरू कर देते हैं।