कोरोना काल मे बीजेपी के ‘ख्याली पुलाव’ पर राहुल का वार, कहा- एक सच भी था…

कोरोना काल मे लगे लॉकडाउन से लेकर बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था से लेकर जीडीपी तक राहुल गांधी सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं। वह ट्वीट के माध्यम से लगातार चीन सीमा पर गतिरोध समेत अन्य मुद्दों पर भी सरकार को घेरते रहे हैं।

कोरोना के चलते फीका रहेगा बिहार का ‘चुनावी दंगल’, चुनाव आयोग ने जारी की गाइडलाइन्स

गाइडलाइन्स के मुताबिक उमीदवार को सिक्योरिटी मनी और नामांकन पत्र ऑनलाइन ही भरना होगा. मतलब की इस बार नामांकन भरने के लिए उम्मीदवार रथ यात्राएं नहीं कर सकेंगे.

सदन में आपसी कलह ढकने की कोशिश, गहलोत ने हासिल किया विश्वास मत, सचिन बोले- मजबूत योद्धा हूँ

सचिन-गहलोत के हाथ मिले हैं दिल नही और ऐसा इसलिए लगा क्योंकि सचिन पायलट की सीट बदल दी गई थी।

भाषण दें घिरी सोनिया, हो गईं ट्रोल

उन्होंने कहा कि इंदिरा जी की शानदार जीत ने देश की राजनीति को ‘बलात्कार’ रख दिया। जबकि इसकी जगह उन्हें पलटकर या बदलकर रख दिया बोलना था।

कांग्रेस के अधिवेशन में राहुल को मिल गई सुपर पावर

कांग्रेस के प्लेनरी सेशन में पार्टी अधिकारियों और शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में एक ऐसे प्रस्ताव पर मुहर लग गई जिसमें राहुल गांधी को यह अधिकार होगा कि वह अपनी नई टीम खुद चुनें।

कांग्रेस के अधिवेशन में एक्टिव दिखीं प्रियंका, संभाली यह बड़ी जिम्मेदारी

क्रिय राजनीति में न होने के बावजूद कई ऐसे मौके आये हैं जब वह पार्टी की कमान पर्दे के पीछे रह कर थामती नजर आई हैं।

क्या करने इटली गए थे राहुल, सोनिया ने बताया यह राज

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने तो यहां तक कह दिया था कि इटली में चुनाव चक रहे हैं और राहुल गांधी शायद वहां वोट डालने गए हैं। हालांकि यह महज एक व्यंग्य था।

इस नेता का मजाक कितना भी उड़े लेकिन यह तय है कि आज नही तो कल बनेंगे पीएम, पढ़ें

राजनीतिक यात्रा की बात करें तो वह अब भी सांसद हैं, पहले भी रहे हैं। सांसद के रूप में भी उनकी जीत भले ही बहुत बड़ी और मुश्किल नही हो लेकिन जीत जीत होती है। ऐसे में शायद अनुभव होने के साथ अगर राहुल अपने पक्ष या बीजेपी के विरोध में खुद को साबित करने में सफल रहे तो उनको शायद ही पीएम बनने से कोई रोक सके।

शाह, मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं यह मुद्दे, क्या चुनाव के लिए तैयार है सरकार?

हाल के दिनों में सरकार रोजगार से लेकर दलित आंदोलन, अर्थव्यवस्था से लेकर बैंकिंग और शिक्षा से लेकर सड़क तक चुनौतियों का सामना कर रही है।

30 साल में 7 वीं बार हो रही विपक्षी एकता की बात, इस बार आवाज़ दक्षिण से आई है

इस बार यह मुद्दा उठाया है दक्षिण के तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने और तो और कुछ दलों ने उनके बयान के बाद आश्वासन और स्वीकृति तक दे दी है।

2019 में मोदी या राहुल, कौन किस पर भारी

राहुल के लिए कांग्रेस की भ्रष्टाचार वाली छवि से उबरना भी मुश्किल नजर आता है वहीँ बीजेपी और केंद्र की मोदी सरकार के किसी भी मंत्री के खिलाफ ऐसा कोई आरोप नहीं है