रबी सीजन में अभी तक पिछली बार से 23.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ज्यादा बुवाई

श में चालू रबी सीजन में अभी तक पिछली बार से 23.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ज्यादा बुवाई हुई है,जो 9.84 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण,ग्रामीण विकास,पंचायत राज तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि कृषि क्षेत्र में सरकार की विशेष रूचि और प्रयासों से किसान उत्साहित हैं,जिससे कृषि क्षेत्र लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

नए कृषि कानून किसानों के जीवन में बदलाव लाने वाले अहम कदम हो रहे हैं साबित

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश में कृषि सुधार और किसानों के हितों के संरक्षण के लिए बनाए गए ये कानून निश्चित ही क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे, जिसका यह एक उदाहरण मात्र है।

आत्मनिर्भर भारत- 1.5 करोड़ किसानों को सरकार ने केसीसी के माध्यम से उपलब्ध कराए 1.35 लाख करोड़ रुपये

सस्ती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए मछली पालकों, पशु पालकों समेत 1.5 करोड़ किसानों को केसीसी जारी करने की उपलब्धि हासिल की गई है। जारी किए गए सभी किसान क्रेडिट कार्डों के लिए खर्च की कुल सीमा 1.35 लाख करोड़ रुपये है।

कृषि बजट पिछले 10 वित्त वर्ष में 11 गुणा बढ़कर 1.34 लाख करोड़ रुपये हुआ-संतोष गंगवार

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने आज कहा कि नए कृषि कानूनों और श्रम सुधार कानूनों से किसानों तथा कामगारों को काफी लाभ होगा।

जम्मू-कश्मीर में आज 21 आयुष और स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों का उद्घाटन होगा

केंद्रीय आयुष मंत्री श्री श्रीपद येसो नाईक और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भद्रवाह में औषधीय पौधों की खेती के लिए पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर के साथ-साथ आयुष स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र का कल जम्मू कश्मीर में शुभारंभ करेंगे।

कृषि बिल के विरोध में पंजाब में प्रदर्शन जारी, पूर्व सीएम बादल के घर के सामने किसान ने खाया ज़हर, हालत नाज़ुक

ऐसे ही एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक किसान ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के घर के सामने ज़हर खाकर जान देने की कोशिश की.

कोरोना और लॉकडाउन संकट के बीच बम्पर पैदावार का अनुमान, बुवाई का बना रिकॉर्ड

भारत सरकार द्वारा समय पर बीज, कीटनाशक, उर्वरक, मशीनरी और ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की वजह से कोविड-19 महामारी की लॉकडाउन स्थितियों में भी बुवाई क्षेत्र में बढ़ोतरी संभव हो पाया है।

उद्योग की आड़ में खो रहे किसान

पूंजीपतियों और सरकार की मिलीभगत के आगे गरीब किसान की एक नही चलती और वह थक हार कर बैठ जाता है। साथ ही जब स्थित्ति बद से बदतर होती है तो उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नही होता।

न खाद, न पानी कैसे चले जिंदगानी

कृषि के लिए पानी की समुचित व्यवस्था आज भी नही है। सरकार ट्यूबवेल लगवाने या पम्प सेट खरीदने के नाम पर सब्सिडी देने की बात करती है, देती भी है लेकिन किसे यह नही पता क्योंकि जिन्हें यह मिलता है वह इसके वाजिब हकदार होते ही नही!

आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों के खिलाफ जब तेलंगाना में किसानों ने फूंक दी अपनी फसल

यूँ तो यह विरोध सिर्फ मिर्च की सही कीमत न मिलने को लेकर था लेकिन यह आंदोलन सभी किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गया।