कलाम न होते तो भारत का क्या होता? इसका जवाब बहुत सरल है। शायद आज भारत अंतरिक्ष के मामले में इतना सम्पन्न न होता। शायद हमारे लिए आज भी “चंदा मामा दूर के होते।”
बिहार में हर साल बाढ़ और सूखा का प्रभाव बराबर रूप से होता है। मुआवजा का खेल भी चलता है लेकिन किसानों तक जब चेक पहुंचता है तो रकम हास्यास्पद होती है। उत्तरी बिहार में बाढ़ जहां हर साल तबाही की एक नई इबारत लिख फसल को तहस नहस कर जाती है वहीं दक्षिणी बिहार में सूखे से किसान बर्बाद होते हैं।