विभिन्न देशों से उपलब्ध रिपोर्टों के आधार से यह माना जा सकता है कि अभी अनेक एसिम्पटोमेटिक (लक्षणविहीन) मामले हैं जिनका परीक्षण नहीं किया गया है। अतः, बीमारी का बोझ भीषण हो सकता है।