योगी की यूपी में आप नेता संजय सिंह की एग्रेसिव एंट्री, क्या बदलेंगे समीकरण?

उत्तरप्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ को अब तक का सबसे बेहतरीन सीएम माना जाता है। सबूत के तौर पर इस बाबत कई सरकारी, गैर सरकारी सर्वे अलग-अलग माध्यमों से उपलब्ध हैं। योगी के आने के बाद से विपक्ष लगभग यूपी में तटस्थ था। सपा बसपा को कोई ऐसा मौका विरले ही मिला जब योगी पर सवाल खड़े कर सकें लेकिन अब अचानक यूपी का माहौल बदल रहा है।

अपनी ही पार्टी के आईटी सेल पर भड़के सुब्रमण्यम स्वामी, कहा- अगर ऐसा हुआ तो मैं जिम्मेदार नही, पढ़ें

बीजेपी से राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी कई ऐसे बयान दे जाते हैं जो पार्टी को असहज स्थिति में डाल देती है। उनकी पहचान बीजेपी के ऐसे नेता के रूप में है जो पार्टी में रहते हुए भी कई मुद्दों पर पार्टी लाइन से हट कर अपनी राय जाहिर करते रहे हैं। इन दिनों सुशांत सिंह राजपूत केस में वह काफी एक्टिव हैं और एक मुखर आवाज़ बन कर न्याय की मांग करने के साथ-साथ कई खुलासे भी कर चुके हैं।

सुब्रमण्यम स्वामी ने पीएम ऑफिस में इसलिए किया फ़ोन, जवाब मिला- हम बाद में बात करेंगे

सुब्रमण्यम स्वामी अलग अलग मुद्दों को लेकर लगातार अपनी बात सोशल मीडिया के द्वारा उठाते रहे हैं। बात चाहे सुशांत सिंह राजपूत मामले की करें या छात्रों द्वारा लगातार NEET और JEE परीक्षा को टालने की वह हमेशा मुखर रहे हैं। कई बार वह अपनी ही पार्टी बीजेपी और उसके नेताओं पर भी तीखी बयानबाजी कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को घेरते हुए तीखा सवाल तब दागा था जब वित्त मंत्री ने कोरोना को एक्ट ऑफ गॉड बता दिया था

बाँका- पूर्व सांसद पुतुल सिंह थामेंगी राजद का दामन, राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी

बाँका की पूर्व सांसद और दिग्विजय सिंह(दादा) की पत्नी पुतुल सिंह राजद के दामन थामेंगी। खबरों के मुताबिक वह तीन सितंबर को पटना स्थित राबड़ी देवी के आवास पर राजद की सदस्यता ग्रहण करेंगी। सूत्रों के अनुसार वह पटना में हैं और जल्द ही इस बात की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। राजद में उनके शामिल होने को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं।

बिहार में बहार नही बड़ा राजनीतिक रार, गठबंधन तोड़ने को फिर नीतीश बेकरार, पढ़ें क्यों?

बिहार राजनीति का केंद्र सदियों और कई दशकों से समझा और माना जाता है। इसे राजनीति का रिसर्च सेन्टर भी कहा जाता है, इसके पीछे की वजह यह है कि यहां राजनीति में जितने प्रयोग हुए उतने शायद ही अन्य किसी राज्य में हुए होंगे।

काश कांग्रेस का यही जोश चुनावी मैदान में दिखता

कांग्रेस ने अपना 84 वां अधिवेशन मनाया। इस दौरान अध्यक्ष के तौर पर न सिर्फ राहुल गांधी बल्कि अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी जमकर गरजे। मोदी, बीजेपी और आरएसएस के साथ कई अन्य मुद्दों को भी उठाया गया।