मानवता और राष्ट्र की सेवा हमारी मूल्य प्रणाली की परंपरा रही है। इसकी जड़ें हमारी परंपरा में दबी हैं जहां यह कहा जाता रहा है कि सेवा उद्देश्यों को समझना और उन्हें आंकना कठिन है।