जनता दल यूनाइटेड(जदयू) की तरफ से एनडीए दल में समन्वय समिति बनाने की मांग उठी है। पार्टी इससे पहले से एनडीए से अपनी अलग राय रखती आ रही है। जद(यू) द्वारा पेगासस स्पाइवेयर मुद्दे की जांच की भी मांग की थी, साथ ही जाति जनगणना के मुद्दे पर भी पार्टी ने विपक्षी दल राजद के साथ मिलकर हाल ही में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी।

राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, जद(यू) के प्रमुख महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा “जिस तरह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान एनडीए की एक समन्वय समिति थी, हम अब इसी तरह की एक समिति का स्वागत करेंगे जो कई मुद्दों पर चर्चा करेगी।

जिन मुद्दों पर हम अलग हैं। यह गठबंधन के सुचारू कामकाज में मदद करेगा और एनडीए गठबंधन के नेताओं की अनुचित टिप्पणियों पर भी लगाम लगाएगा।” इसके आगे नीतीश कुमार को दोबारा प्रधानमंत्री पद के लिए सही दावेदार बताया गया।

त्यागी ने कहा, “हमने पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में एक प्रस्ताव पारित किया है कि नीतीश कुमार पीएम की दौड़ में नहीं हैं, लेकिन उनमें वो सभी गुण हैं जो एक पीएम में होने चाहिए।”

इस तरह के प्रस्ताव की आवश्यकता के बारे में पूछे जाने पर, महासचिव ने कहा कि अक्सर इस तरह की चर्चाएं होती रहती है और जद(यू) इस तरह की बातों पर अपना स्टैंड क्लियर रखना चाहती है। नेता ने यह भी बताया कि पार्टी जाति जनगणना की मांग करना जारी रखेगी। त्यागी ने कहा, “हम प्रधानमंत्री की सकारात्मक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।”

वहीं इस समन्वय समिति की मांग के बारे में पूछे जाने पर भाजपा नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद का कहना है कि इसे उनका समर्थन प्राप्त है क्योंकि यह विभिन्न मुद्दों पर समन्वय करने में मदद करेगा।

गौरतलब हो कि 23 अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जाति जनगणना के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए 10 पक्षीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। इससे पहले मुख्यमंत्री ने पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग कर फोन की निगरानी के आरोपों की जांच की भी मांग की थी।

हालांकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा जातिगत जनगणना के संबंध में कोई भी कदम उठाने से बच रही है। पार्टी के कई नेताओं ने निजी तौर पर कहा कि हाल के वर्षों में ओबीसी मतदाताओं द्वारा पार्टी के लिए जमकर हुई वोटिंग को देखते हुए पार्टी ओबीसी का विरोध करने का जोखिम नहीं उठा सकती।

इसे लेकर 20 जुलाई को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने भी कहा था कि भारत सरकार ने एससी और एसटी के अलावा अन्य जाति-वार आबादी की गणना नहीं करवाने का निर्णय लिया है।

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