कोरोना वायरस की भारत मे एंट्री के बाद से लॉकडाउन का एक लंबा वक्त लोगों ने घरों में कैद होकर बिताया। इस दौरान जहां सार्वजनिक परिवहन सेवाएं ठप थी वहीं लंबे समय तक निजी गाड़ियों को भी पास लेने के बाद ही चलने की अनुमति थी। हालांकि अब धीरे-धीरे आम जनजीवन को पटरी पर लाने की कोशिशें न सिर्फ सरकारें कर रही है बल्कि कोरोना की मार से बुरी तरह प्रभावित हो चुके आमलोग भी अब सामान्य जनजीवन की तरफ लौटने लगे हैं।


आम जीवन को पटरी पर लाने के लिए सार्वजनिक परिवहन सेवाएं शुरू कर दी गई है। हालांकि लोगों के मन मे असुरक्षा का एक भाव है। कोरोना के लगातार बढ़ते केस इस डर को और बढ़ा रहे हैं यही वजह है कि अब लोग अपने निजी वाहनों को पहले से भी ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफेक्चरर्स (SIAM) और ग्रांट थॉमसन इंडिया (GTI) के सर्वे में पाया गया है कि करीब 73 फीसदी लोग अर्थव्यवस्था में सुधार होने पर नया वाहन खरीदना चाहते हैं।


सियाम और जीटीआई के सर्वे में लोगों से सार्वजनिक परिवहन और निजी गाड़ियों से परिवहन को लेकर सवाल किए गए। इसमें लोगों ने निजी वाहनों को प्राथमिकता दी। वहीं इस सर्वे में शामिल 29 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह अगले एक साल के अंदर अपनी गाड़ी लेने की योजना बना रहे जबकि 8 फीसदी ने माना कि अगले 6 महीने में उनकी नई गाड़ी लेने की योजना है। वहीं 56 फीसदी लोगों ने पहले से इस्तेमाल कर रहे अपने वाहनों के इस्तेमाल को जारी रखने की बात कही है।


रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल 20 फीसदी लोगों ने कहा कि वह टू व्हीलर लेने की इच्छा रखते है. वहीं, 20 फीसदी लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं। कोरोना संकट के बीच 68 फीसदी लोग शोरूम जाकर वाहन खरीदना चाहते है। वहीं, 25 फीसदी लोगों ने कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचने के लिए ऑनलाइन चैनल्स के जरिये व्‍हीकल की खरीद को तरजीह दी। इसके अलावा 7 फीसदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म  के जरिये वाहन के चुनाव की बात की।