बिहार वह राज्य है जहां से हर दिन कोई न कोई ऐसी खबर आती है जो लोगों को चौंकाने के लिए काफी होती है। दूसरी ख़बरों की आज बात नही करते हैं बस बात करते हैं एक शख्स लौंगी भुइयां की जिन्होंने दशरथ मांझी की कहानी फिर याद दिला दी। जी हाँ वही दशरथ मांझी, जिन्होंने कहा था जब तक तोड़ेंगे नही तब तक छोड़ेंगे नही और न छोड़ा था। पहाड़ का सीना चीर रास्ता बना कर ही माने थे। अब एक ही कहानी एक बार फिर उसी दशरथ मांझी के जिले गया से आई है।

गया के लाहथुआ इलाके में अपने गांव कोठीलावा के पास की पहाड़ियों से बारिश के पानी को नीचे की ओर ले जाने के लिए एक आदमी ने 3 किलोमीटर लंबी नहर खोदी। लुंगी भुइयां कहते हैं, “पिछले 30 सालों से मैं अपने मवेशियों को पालने के लिए पास के जंगल में जाता था और गाँव के एक तालाब में पानी ले जाने वाली नहर की खुदाई करता था। इस प्रयास में कोई भी शामिल नहीं हुआ … ग्रामीणों ने आजीविका कमाने के लिए शहरों का रुख किया लेकिन मैंने वापस रहने का फैसला किया। ” 

लौंगी भुंइया की यह कहानी आज तब सामने आई जब न्यूज़ अजेंसी एएनआइ ने उनसे बातचीत कर तस्वीरेँ जारी की है। दशकों की इस मेहनत को सलाम।