बॉलीवुड क्वीन के नाम से मशहूर अभिनेत्री कंगना रनौत ने बॉलीवुड माफिया, ड्रग्स माफिया और बॉलीवुड के ठेकेदारों के खिलाफ आवाज़ क्या मुखर की महाराष्ट्र की पूरी सत्ता एक तरफ से उनके पीछे पड़ गई। पहले जहां बॉलीवुड के कई बड़े नाम कंगना के बयानों से बेचैन हो उठे वहीं बाद में सत्ता के शिखर तक को कंगना की बात नागवार गुजरी।


यही वजह रही कि संजय राउत जहां निजी हमले और अश्लील भाषा तक पर उतारू हो गए वहीं सीएम जैसे पद की गरिमा तक का ध्यान किये बिना सीएम उद्धव ठाकरे भी इस मामले में कूद पड़े। भले ही उन्होंने नाम न लिया लेकिन समझदार के लिए इशारा काफी है कि तर्ज पर वह अपनी बात कह गए।


सच कड़वा होता है यह कहावत प्रचलित है और अगर इसका उदाहरण देखना हो तो सुशांत सिंह राजपूत केस में बेनकाब होते चेहरे मुम्बई में उदाहरण स्वरूप दिख जाएंगे। क्या बॉलीवुड और क्या सत्ता बड़े बड़े मठाधीस सीबीआई, ईडी और नारकोटिक्स विभाग की जांच की वजह से सदमे में हैं और हर दिन कोई न कोई ऐसा बयान दे रहे जो उन्हें शक के दायरे में ला खड़ा कर रहा।


इसी क्रम में आज जब BMC ने कंगना के आफिस ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ पर छापा मारा और अभद्र भाषा का प्रयोग किया तो यह समझना मुश्किल नही था कि यह सब सत्ता के दबाव में हुआ है। वहीं अब खबर है कि कल कंगना की गैरहाजिरी में उनके ऑफिस और उनके 15 साल पुराने सपने को ढहा दिया जाएगा बल्कि गृह मंत्रालय से Y कैटेगरी सुरक्षा प्राप्त अभिनेत्री को मुम्बई आते ही क्वारंटाइन भी किया जाएगा।

इस वाकये को देख फ़िल्म नायक का वह सीन याद आ गया जब एक दिन के सीएम अनिल कपूर का घर सत्ता के खिलाफ जाने की वजह से ढहा दिया जाता है। कंगना ने सत्ता और माफिया के साथ बॉलीवुड के कुछ तथाकथित गॉडफादर के खिलाफ आवाज़ क्या उठाई आज कई मठाधीश खिलाफ खड़े हो गए वहीं कई चुप्पी साध गए। कंगना ने सच कहा और वह आगे भी इस मामले में भुक्तभोगी बनना स्वीकार कर रही हैं लेकिन आज जो कई बड़े नाम चुप हैं उन्हें यह मानना चाहिए यह मठाधीश न किसी के थे न आपके होंगे। सच बोलना आसान नही होता।