राजनीति विशेष

#AirStrike इस बार इंटरनेशनल प्रेशर न पाला तभी सिर्फ 21 मिनट में पाकिस्तान हिला डाला

रात के वक़्त जब डिजिटल इंडिया के अमेरिकन प्लेटफार्म पर खबरों को स्क्रॉल कर रहा था तो यह अंदाज़ा कतई नही था कि आज की रात कुछ बड़ी होनी है। यह अंदाजा तो था कि कुछ बड़ा होना है लेकिन ऐसा आभास कहीं से नही आया कि वह दिन आने वाला है जब पीओके में आतंकी कैम्प पर एयर स्ट्राइक होगी। फेसबुक और आभासी दुनिया मे यह खबर कई दिनों से फ़िज़ाओं में थी कि मोदी के रहते वक़्त हमारा होगा, गोली हमारी होगी और आतंक को पालने वाले आकाओं, बर्बादी तुम्हारी होगी लेकिन कब, यह संशय था। रात में तकरीबन एक बजे के आसपास रक्षा और विदेश मंत्रालय के सूत्रों से हवा में उड़ती कुछ खबरें इस बात की तस्दीक करने लगीं। हालांकि उस वक़्त आमतौर पर हम सोने की तैयारी कर रहे होते हैं।

इस तैयारी में देश दुनिया को अगले दिन हिला कर रख देने वाली खबर छूट गई। देश की राष्ट्रीय राजधानी के आसमान में चल रही गहमागहमी पर दिन भर की थकान भारी पड़ी। विमानों की आवाज़ नींद के आगोश में कहीं खो गई। जब नींद खुली तो वक़्त था अलसाई सुबह का तकरीबन 7 बजकर 15 मिनट,आदतन मजबूर अलार्म बंद किया और फेसबुक खोला, उसके बाद नोटिफिकेशन और गालियों के जवाब देने के बाद न्यूज़ पढ़ने को आतुर मन समाचार के माध्यमों में व्यस्त हो गया।

नींद जैसे उड़ गई, मन में एक साथ सावन और वसंत ऋतु जैसी खुशी आन पड़ी। हालांकि जिस खबर की वजह से यह सब था वह खबर थी एयर स्ट्राइक की। यह वह खबर थी जिसका इंतजार देश की 125 करोड़ जनता 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले के बाद कर रही थी। भारत के प्रधानमंत्री ने 15 फरवरी को कहा था कि बस अब और बर्दास्त नही, मतलब साफ था कुछ बड़ा होना है, अमेरिका और फ्रांस ने समर्थन देकर इस बात की तस्दीक कर दी लेकिन जब मिराज-2000 विमानों के पाक स्थित आतंकी ठिकानों को तबाह करने की खबर सुबह आई तो यह आम सुबह नही थी।

ऑफिस से लेकर घर तक, मोहल्ले से लेकर समाज तक, वास्तविक दुनिया से लेकर आभासी दुनिया तक हर जगह बस यही चर्चा थी। कैब से लेकर मेट्रो, सीआईएसएफ के जवानों को सलामी और मिठाई देने की बात मन मे आई। दे भी आया। ऑफिस में बधाई दी। इसके बाद विदेश सचिव सामने आए और पूरी कहानी, तैयारी, एक्शन सब कुछ बयां कर गए। इसके बाद दिल को तसल्ली मिली, सवालों का जवाब मिला, सुकून मिला और सबसे ज्यादा अपने नेता पर भरोसा पुनः जाग उठा। मतलब मोदी है तो मुमकिन है का नारा स्वतः याद आया।


इसके बाद याद आई देश भक्ति, जवानों की शहादत, विपक्ष की राजनीति, 56 इंच के सीने पर सवाल और पाक के प्रति आम जनमानस का गुस्सा। यह लाजमी भी था, गुस्सा वहीं उपजता है जहां उम्मीदें और आशा होती है। जब 2014 में देश ने मोदी को पूर्ण बहुमत से सत्ता सौंपी तो यही अभिलाषा थी कि एक के बदले बीस शीश काटे जाएंगे, दुश्मन को बर्बाद किया जाएगा, भारत के खिलाफ उठने वाली हर आंख और आवाज़ को माकूल जवाब देने कब लिए, आज उसकी परीक्षा का दिन था। भावनाओं को व्यक्त करने का दिन था। सही मायनों में आज बदला पूरा हुआ, उरी के बाद पुलवामा के हमले का जवाब दिया गया। आज देश मे एक साथ होली भी मनी और दीवाली भी। शहीदों की याद में दीप भी जले और नायकों की याद में गुलाल भी उड़ा।


इन सब बातों के बीच एक बात खास थी। वह बात थी मोदी की विदेश यात्रा पर सवाल उठाने वालों पर भी आज पानी फिर गया। गठबंधन जो मोदी की तारीफ चाहते हुए भी न कर सका लेकिन सेना को सलाम दे गया। बदले की भावना में जलते देश को साहस और समर्थन दे गया। साथ ही दे गया मोदी को एक और मौका। आज आम जनता देश के लिए मोदी के साथ है। नाजुक वक़्त है लेकिन यह एकता संतुष्टि की प्रतीक है। साथ ही यह वक़्त है जब आक्रोश, गुस्सा, धर्म-जाति का भेदभाव भूल एक साथ आया। माहौल माकूल हुआ और 125 करोड़ की आबादी वाले भारत के सामने दुनिया की हर महाशक्ति सर झुकाए, हाथ जोड़े खड़े हो गई। शायद इसलिए कहते हैं एकता में बल है।


विपक्ष की बात करें तो राजनीति का मौका उनके हाथ से लगभग जा चुका है। 2019 के चुनाव जाति-धर्म-संस्कृति के ऊपर उठ कर लड़े जाएंगे। मुद्दा ईमानदारी का होगा। मुद्दा सद्भाव का होगा। मुद्दा घोटालों के इतिहास का होगा। मुद्दा दुश्मन को माकूल जवाब देने का होगा। मुद्दा किसानों को सम्मान देने का होगा। मुद्दा शहीदों और सेनानियों के सम्मान का होगा। मुद्दा युवाओं के होश, जोश और समर्थन का होगा। मुद्दा देह, देहभक्त, देश और जनता के समर्थकों का होगा। मोदी के वादों का इरादों का होगा। विपक्ष के झूठे आरोपों का होगा। विदेश यात्रा पर सवाल का होगा। बेरोजगारी का होगा लवकिं इन सब से ऊपर एक बात का होगा और वह बात होगी, सौंगध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नही झुकने दूंगा, मैं देश नही रुकने दूंगा, मैं देश नही मिटने दूंगा। और यह शब्द यह वाक्य हमारे पीएम के हैं, हमारे जननायक के हैं। यह देश मे हो रहा बदलाव है। हमारे आंतरिक मुद्दे आज एक तरफ हैं लेकिन देश के खिलाफ बाहरी आवाज़ का दबना आज ज्यादा जरूरी है। जो हो रहा है। इसलिए इस वादे में दम नजर आता है मोदी है तो मुमकिन है।

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Vijay Rai
Human by Birth,Hindu by Religion,Indian by Nationality,Politics is my choice,journalism-my passion.

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