हाथरस गैंगरेप और हत्या काण्ड में पहली सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन के की कार्यवाही पर सवाल उठाये और जम कर लताड़ लगाई. कोर्ट के सवालों के सामने उत्तर प्रदेश प्रसाशन घिरता दिखाई दिया.
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस राजन रॉय ने पीड़िता का रात को अंतिम संस्कार करने के ऊपर अधिकारियो से पूछा की क्या आप में से किसी की बेटी होती तो आप रात को इसका अंतिम संस्कार होने देते. कोर्ट ने पुलिस के ढीले रवैये पर भी सवाल खड़े किये.
इसके जवाब में डीएम ने कोर्ट में लड़की के अंतिम संस्कार से अपना पल्ला झड़ते हुए कहा की इसका फैसला स्थनीय प्रसाशन ने लिया था. डीएम या शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारीयों का इस फैसले से कोई लेना देना नहीं है. स्थनीय क़ानून व्वयस्था को न बिगड़े, इसलिए यह कदम उठाया गया. इस जवाब पर कोर्ट ने घेरते हुए पूछा की इतने पुलिस बल होने के बाद भी क़ानून व्वयस्था कैसे बिगड़ सकती थी.
वहीँ दूसरी और पीड़िता के परिवार ने भी अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा की उनकी मर्ज़ी के बिना अंतिम संस्कार किया गया. उन्हें तो यह भी नहीं पता की वह किसकी लाश थी. उन्होंने स्थानीय पुलिस और प्रसाशन पर दबाव बनाने का आरोप लगते हुए कहा की उन्हें अपनी जान का खतरा है. कोर्ट के सामने उन्होंने अपनी तीन मांगे रखी.
परिवार की पहली मांग यह है की जब तक इस केस में फैसला नहीं आ जाता, CBI की जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक न की जाए. दूसरी मांग यह रखी की इस केस को उत्तर प्रदेश से कहीं और ट्रांसफर कर दिया जाये और तीसरी मांग अपने परिवार की सुरक्ष को लेकर रखी.
परिवार की तरफ से कोर्ट में पीड़ित परिवार का पक्ष वकील सीमा कुशवाहा ने रखा वहीँ वकील विनोद शाही यूपी सरकार की ओर से पक्ष रख रहे थे.
पीड़ित परिवार के साथ हाई कोर्ट ने मामले में ढिलाई बरतने के चलते अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार और एसपी रहे विक्रांत को भी पेश होने को कहा था.
केस की अगली सुनवाई अब 2 नवंबर को होनी है. जिन-जिन मुद्दों पर आज कोर्ट ने सवाल उठाये है उन पर अधिकारीयों को जवाब देना होगा.
वहीँ CBI ने भी इस केस की जांच शुरू कर दी है. इस केस में उसने FIR भी दर्ज़ कर ली है. जल्द ही सीबीआई की एक टीम घटना स्थल का दौरा करेगी और वहाँ से सबूत जुटाने की कोशिश करेगी.
