बनारस, काशी कहें या कहें वर्णसिंएक ऐसा शहर जिसकी पहचान ही शिव हैं। जिसका अस्तित्व ही गंगा है। जो संस्कृति और मोक्ष का केंद्र रहा है। भला उस शहर में गलत के पक्ष में कोई बात कैसे उभर सकती है। चिंता न कीजिये ऐसा हुआ भी नही है। बल्कि इस शहर ने तो भटकों को रास्ता दिखाया है और भगवान भोले के सम्मान में क्रांति का एक अलग बिगुल सा बजाया है।
