आयुष सेक्टर के उभरते हुए आईटी आधार वाले आयुष ग्रिड का राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के साथ होगा परिचालन एकीकरण

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेक की अध्यक्षता में हाल ही में संपन्न हुई उच्च स्तरीय बैठक में आयुष सेक्टर के उभरते हुए आयुष ग्रिड का राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के साथ (एनडीएचएम) परिचालन एकीकरण का समर्थन किया गया।

आयुष मंत्री कल पुणे में जनजातीय स्वास्थ्य सेवा के लिए प्राकृतिक चिकित्सा परियोजना का उद्घाटन करेंगे

गांधी जयंती के अवसर पर, आयुष राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री श्रीपद येसो नाइक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कल पुणे, महाराष्ट्र में गोहेबुद्रुक के एक जनजातीय गांव में नेचुरोपैथी अस्पताल का उद्घाटन करेंगे।

गांधी जयंती के उपलक्ष्य में नेचुरोपैथी पर वेबिनार्स की एक शृंखला का आयोजन किया जाएगा

आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय नेचुरोपैथी संस्थान, पुणे महात्मा गांधी की 150वीं जयंती महोत्सव के उपलक्ष में 2 अक्टूबर, 2020 से महात्मा गांधी के स्वदेशी विचारों और दर्शन को महत्व देते हुए नेचुरोपैथी पर वेबिनार्स की एक श्रृंखला का आयोजन आरंभ करेगा, जो राष्ट्रीय नेचुरोपैथी दिवस 18 नवंबर, 2020 तक जारी रहेगा।

आयुष मंत्रालय ने कार्य स्थल पर ‘योग हेतु अवकाश’(योग ब्रेक) की फिर शुरुआत की

आयुष मंत्रालय के योग ब्रेक प्रोटोकॉल से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आज से पुणे योग ब्रेक की शुरुआत हो रही है, जिसे कोविड-19 महामारी के करण अस्थाई तौर पर स्थगित कर दिया गया था।

भारतीय चिकित्‍सा पद्धति और होम्‍योपैथी की चिकित्‍सा शिक्षा में क्रांतिकारी सुधार लाया जाएगा

आयुष मंत्रालय के दो महत्‍वपूर्ण विधेयक संसद में पारित होने के साथ ही देश में भारतीय चिकित्‍सा पद्धति और होम्‍योपैथी की चिकित्‍सा शिक्षा में क्रांतिकारी सुधार करने के लिए देश पूरी तरह तैयार है।

हिंदी दिवस विशेष- बहुतायत हिंदी आबादी फिर भी हिंदी बदनाम, पढ़े कुछ खास

भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में रट्टू तोते की तरह हिंदी बताई जाती है। भारत मे एक बड़ी आबादी हिंदी का प्रयोग बोलचाल के लिए भी करती है। यूनाइटेड नेशन्स तक मे इसका डंका बज चुका है। अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर पीएम नरेंद्र मोदी तक हिंदी को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन इन सब के बीच एक दुख यह है कि क्या हिंदी को वह गौरव मिला जिसकी यह हकदार थी? या क्या हिंदी ने उनके लिए वह किया जो इसके पैरोकार थे? जैसे हिंदी के कवि लेखक या हिंदी मीडियम को अपनी ताकत मानने वाले बेटे बेटियां? एक हालिया विवाद की वजह से यह सवाल आम हो जाते हैं।