देश मे जब उंगलियों पर गिने जाने मात्र केस थे तब सरकारों ने लॉकडाउन लगाया और अब जबकि हर दिन देश के हर राज्य में कोरोना संक्रमण के मामले हर दिन नए रिकॉर्ड बनाने पर आमादा हैं, 68 हजार से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं ऐसे में परीक्षा के आयोजन का औचित्य समझ से परे नजर आता है। आर्थिक गतिविधियों के बंद होने से जीडीपी,रोजगार का बुरा हाल है और उन्हें सुचारू रूप से शुरू करने की जगह परीक्षा को प्राथमिकता देना कितना उचित है?
