1993 मुंबई दंगों से जुड़े मामले में मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने 28 साल बाद एक आदमी को यह कहते हुए बरी किया वह निर्दोष है। अदालत ने कहा है कि यह शख्स सिर्फ़ दंगे की घटना का प्रत्यक्षदर्शी था।