जोशीमठ को बचाने का विध्वंस आज से शुरू 

अधिकारियों ने कहा है कि उत्तराखंड के जोशीमठ में जिन इमारतों में दरारें आ गई हैं और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, उन्हें आज से ढहा दिया जाएगा।

अधिकारियों ने कहा है कि उत्तराखंड के जोशीमठ में जिन इमारतों में दरारें आ गई हैं और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, उन्हें आज से ढहा दिया जाएगा।

जोशीमठ को भू-धंसाव या धरातल के डूबने या जमने से खतरे की भयावहता के आधार पर ‘डेंजर’, ‘बफर’ और ‘कंप्लीटली सेफ’ तीन जोन में बांटा गया हैं।

अधिकारियों ने बताया कि डूबते जोशीमठ में कुल 678 इमारतों में दरारें आ गई हैं। जो सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हैं उन्हें ध्वस्त कर दिया जाएगा।

डेंजर जोन में कई घरों के अलावा, दो होटल – माउंट व्यू और मलारी इन – जो एक-दूसरे की ओर झुके हुए हैं, को भी ध्वस्त किया जाएगा।

‘डूबते’ शहर को आपदा-प्रवण क्षेत्र घोषित किया गया है और जोशीमठ और आसपास के क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया हैं। एक अधिकारी ने कहा, “ऐसा लगता है कि जोशीमठ का 30 फीसदी हिस्सा प्रभावित हुआ है। एक विशेषज्ञ समिति द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है और इसे प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपा जाएगा।

लगभग 4,000 लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है।” चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने कहा कि प्रभावित लोगों की हर संभव मदद की जा रही हैं।

जोशीमठ में जमीन की सतह के डूबने का आकलन करने के लिए केंद्र द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ पैनल द्वारा क्षतिग्रस्त घरों के विध्वंस की सिफारिश की गई थी।

विशेषज्ञों ने खतरनाक स्थिति के लिए पनबिजली परियोजनाओं सहित अनियोजित बुनियादी ढांचे के विकास को जिम्मेदार ठहराया हैं।

विध्वंस केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) की एक टीम की देखरेख में किया जाएगा, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) को उनकी सहायता के लिए बुलाया गया हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी से एक टीम के रूप में काम करने और शहर को बचाने की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य सरकार को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया हैं।

निवासियों ने कहा है कि उन्होंने पिछले महीने तीन बार मुख्यमंत्री को लिखा था, उन्हें नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) परियोजना की सुरंगों में विस्फोटों के प्रभाव के बारे में चेतावनी दी थी।

एनटीपीसी ने अपनी परियोजना और जोशीमठ की स्थिति के बीच किसी भी संबंध से इनकार किया हैं। जोशीमठ को भगवान बद्रीनाथ का “शीतकालीन गद्दी” कहा जाता है, जिनकी मूर्ति हर सर्दियों में शहर के मुख्य बद्रीनाथ मंदिर से वासुदेव मंदिर तक लाई जाती हैं। यह सिखों के पवित्र मंदिर हेमकुंड साहिब का प्रवेश द्वार भी हैं।

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