छपरा शराबकांड का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, एसआईटी से जांच की अपील को लेकर याचिका दायर

बिहार में जहरीली शराब का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। बिहार के छपरा जिले के बाद अब अन्य जिलों से भी जहरीली शराब से मौत की खबर आ रही हैं।

बिहार में जहरीली शराब का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। बिहार के छपरा जिले के बाद अब अन्य जिलों से भी जहरीली शराब से मौत की खबर आ रही हैं।

छपरा के अलावा सीवान और बेगूसराय में भी जहरीली शराब से मौत हुई हैं। वहीं अगर छपरा जहरीली शराब कांड की बात करें तो इसमें अब तक 73 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 25 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई हैं।

हालांकि प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 34 शवों का पोस्टमार्टम किया जा चुका हैं। ऐसे में जिला प्रशासन की ओर से 34 मौतों के आधिकारिक आंकड़े बताए जा रहे हैं।

लेकिन गैर सरकारी आंकड़े 75 से ज्यादा मौतों की बात कर रहे हैं। इनमें सच्चाई भी है क्योंकि ज्यादातर लोग बिना पोस्टमॉर्टम के शवों को जला रहे हैं। कुछ लोगों ने डर के मारे ठंड से मौत बताकर शवों को जला भी दिया हैं।

इनकी गिनती करें तो जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या 80 तक जा रही हैं। डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने बिहार में शराब सप्लाई के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताया हैं।

राजद नेता ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों से बिहार में शराब की खेप पहुंचाई जा रही हैं। भाजपा राज्य में शराबबंदी को विफल करने की साजिश रच रही हैं।

यह जानबूझकर बिहार सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा हैं। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने का उल्लेख किया गया था।

खंडपीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने अधिवक्ता पवन प्रकाश पाठक से कहा कि याचिकाकर्ता को मामले को सूचीबद्ध करने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा। 

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