मोरबी पुल हादसे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, प्रधानमंत्री जल्द करेंगे गुजरात अस्पताल का दौरा

प्रधानमंत्री के मोरबी में घटना स्थल और घायलों को भर्ती किए गए सिविल अस्पताल का दौरा करने की उम्मीद है। उन्होंने कल रात एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उन्हें बचाव प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई।

प्रधानमंत्री के मोरबी में घटना स्थल और घायलों को भर्ती किए गए सिविल अस्पताल का दौरा करने की उम्मीद है। उन्होंने कल रात एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उन्हें बचाव प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई।

मोरबी में ब्रिटिश काल का सस्पेंशन ब्रिज, जो मार्च से नवीनीकरण के लिए बंद था, रविवार की रात को ढह गया – जनता के लिए फिर से खुलने के ठीक चार दिन बाद।

अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में कम से कम 47 बच्चे, कई महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। पुल ढहने के समय करीब 500 लोग उस पर सवार थे।

हालांकि 150 साल पुराना यह ढांचा करीब 125 लोगों का ही वजन उठा सकता हैं। दस्तावेजों से पता चलता है कि पुल को समय से पांच महीने पहले जनता के लिए खोल दिया गया था।

ओरेवा समूह, पुल का नवीनीकरण करने वाली कंपनी ने पुल खोलने से पहले नागरिक अधिकारियों से फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं लिया, जिसकी पुष्टि मोरबी नगरपालिका एजेंसी के प्रमुख संदीपसिंह जाला ने रविवार को मीडिया से की।

कंपनी रखरखाव और मरम्मत के लिए पुल को कम से कम आठ से 12 महीने तक बंद रखने के अपने अनुबंध से बाध्य थी। पुलिस ने एक प्राथमिकी में कहा कि पिछले हफ्ते पुल को खोलना “गंभीर रूप से गैर जिम्मेदार और लापरवाह इशारा” था।

अधिकारियों ने कहा की रविवार को 400 से अधिक लोगों को टिकट ₹12 से ₹17 में बेचे गए, जिसके परिणामस्वरूप “हैंगिंग ब्रिज” पर भीड़भाड़ हो गई, जिससे पुराने धातु के तार रास्ता देने लगे।

सूत्रों ने कहा कि गुजरात की फोरेंसिक प्रयोगशाला ने भी पाया है कि लोगों की भारी भीड़ के कारण पुल ढह गया। सूत्रों ने कहा कि ओरेवा समूह द्वारा सात महीने के नवीनीकरण के दौरान मोरबी में पुल के कुछ पुराने केबल नहीं बदले गए।

पिछले हफ्ते पुल का उद्घाटन करते हुए, ओरेवा के प्रबंध निदेशक जयसुखभाई पटेल ने कहा था कि कंपनी ने “₹ 2 करोड़ में 100 प्रतिशत नवीनीकरण” किया था और यह कम से कम आठ से दस वर्षों तक टिकेगा।

मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें ओरेवा के प्रबंधक, टिकट संग्राहक, पुल मरम्मत ठेकेदार और तीन सुरक्षा गार्ड शामिल हैं जिनका काम भीड़ को नियंत्रित करना था।

पुल टूटने से लोग एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े। वीडियो में दिखाया गया है कि कई लोग पुल के अवशेषों से चिपके हुए हैं, जबकि कुछ को सुरक्षित तैरते हुए देखा गया है।

पुल गिरने के पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को राज्यव्यापी शोक की घोषणा की हैं। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *