सुप्रीम कोर्ट ने टीवी पर प्रसारित अभद्र भाषा की निंदा की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि टीवी एंकरों की भूमिका यह निगरानी करने में महत्वपूर्ण है कि उनका शो अभद्र भाषा की झड़ी में न गिरें।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि टीवी एंकरों की भूमिका यह निगरानी करने में महत्वपूर्ण है कि उनका शो अभद्र भाषा की झड़ी में न गिरें।

अदालत ने कहा कि मुख्यधारा के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया पर सामग्री काफी हद तक अनियंत्रित है। टीवी पर अभद्र भाषा को रोकना एंकरों का कर्तव्य हैं।

न्यायमूर्ति के.एम. जोसफ ने टीवी पर कहा, “हम नफरत को हवा नहीं दे सकते।” अदालत ने आश्चर्य जताया कि सरकार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में फैलाई गई नफरत के लिए मूकदर्शक क्यों बनी हुई हैं।

अदालत अभद्र भाषा की मात्रा में भारी वृद्धि के खिलाफ़ याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 23 नवंबर की तारीख तय की।

सुप्रीम कोर्ट टीवी पर नफरत को रोकने के अपने प्रयासों में लगातार बना हुआ हैं। जनवरी 2021 में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने कहा था कि टीवी पर नफरत को कम करना कानून और व्यवस्था के लिए उतना ही आवश्यक था जितना कि पुलिसकर्मियों को लाठियों से लैस करना और हिंसा और दंगों को फैलने से रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाना।

“निष्पक्ष और सच्ची रिपोर्टिंग आम तौर पर कोई समस्या नहीं है। समस्या तब होती है जब [प्रसारण, कार्यक्रम] दूसरों को उत्तेजित करने के लिए प्रयोग किया जाता हैं।

ऐसे प्रसारण, कार्यक्रम हैं जो निश्चित रूप से लोगों को उकसाने का प्रभाव रखते हैं, न केवल एक समुदाय के खिलाफ, बल्कि किसी भी समुदाय के खिलाफ… आप उनके प्रति अंधे क्यों हैं… आप इसके बारे में कुछ नहीं करते हैं?” जस्टिस बोबडे ने कहा।

अदालत उस समय जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि मीडिया के कुछ वर्गों ने तब्लीगी जमात मण्डली को कोविड​​​​-19 संक्रमण के प्रसार में स्पाइक से जोड़कर सांप्रदायिक बना दिया। 

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