लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में हुए बवाल के दौरान मारे गए किसानों की आत्मा की शांति के लिए आज अंतिम अरदास यानि श्रद्धांजलि सभा का कार्यक्रम जारी रखा गया था। इस श्रद्धांजलि सभा के लिए करीब 30 एकड़ इलाके में इंतजाम किए गए थे।

यह कार्यक्रम स्थल घटनास्थल से एक किलोमीटर की दूरी पर रखा गया था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी इस सभा को संबोधित करने आई थी। हालांकि वह नीचे से ही बैठकर किसानों को सुनती नजर आईं क्योंकि उन्हें मंच पर जगह नहीं मिली।

उनके अलावा राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी को भी मंच पर जगह नहीं दी गई। तिकुनिया में संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि “हम प्रियंका गांधी, दीपेंद्र हुड्डा का स्वागत करते हैं। मगर हम लोगों का यह निर्णय है कि किसान संयुक्त मोर्चा का मंच किसी राजनैतिक व्यक्ति से साझा नहीं किया जाएगा।”

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आज लखीमपुर खीरी का दौरा करने गई थी लेकिन उनके दौरे के विरोध में लखीमपुर के रास्ते में सिख समाज के लोगों ने कई ऐसे होर्डिंग लगाए थे। इन होर्डिंगस पर 1984 के सिख दंगों के घटनाक्षसे जोड़कर नारे लिखे हुए गए थे। “नहीं चाहिए फर्जी सहानुभूति, खून से भरा है दामन तुम्हारा, तुम क्या दोगे साथ हमारा, नहीं चाहिए साथ तुम्हारा” जैसे नारों के जरिए कांग्रेस महासचिव का विरोध हुआ।

वहीं, अंतिम अरदास में मंच पर किसान नेता राकेश टिकैत के साथ अन्य किसान मौजूद रहें। प्रियंका गांधी ने आम लोगों के बीच में बैठकर अरदास की। इससे पहले उन्होंनेक्षचारों किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित किया।

मंच से किसानों नेताओं ने सरकार को फिर से आगाह करते हुए तीन अक्टूबर को हुई घटना को लोमहर्षक बताते हुए कहा कि इसके सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाए बिना संयुक्त मोर्चा मानने वाला नहीं है।

किसान नेताओं ने यह भी मांग रखी कि केंद्रीय मंत्री के बेटे की गिरफ्तारी हुई लेकिन केंद्रीय मंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसानों ने कहा कि मांगों में यह दोनों मांगे प्रमुख रूप से शामिल की गई थी।